सीरिया पर तुर्की के हमले और ज़मीनी सच्चाइयां
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वर्ष 2011 में सीरिया संकट आरंभ होने के बाद से इस देश पर तुर्की के पहले खुल्लम-खुल्ला हमले पर क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २५, २०१६ १२:४५ Asia/Kolkata

वर्ष 2011 में सीरिया संकट आरंभ होने के बाद से इस देश पर तुर्की के पहले खुल्लम-खुल्ला हमले पर क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

तुर्की के प्रधानमंत्री कार्यालय ने 24 अगस्त को घोषणा की कि सीरिया के जराबलस शहर को दाइश से मुक्त कराने के लिए तुर्की ने अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ के साथ मिल कर इस शहर पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं और तुर्क सेना के विशेष दस्तों को भी सीरिया से मिलने वाली सीमा पर भेज दिया गया है। इसी के साथ तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान ने भी कहा कि सीरिया में आतंकी गुटों के मुक़ाबले में तुर्की का संयम समाप्त हो चुका है और वह दाइश और कुर्द डेमोक्रेटिक पार्टी पर हमले शुरू कर रहा है।

 

वास्तविकता यह है कि तुर्की अमरीका व रूस की हरी झंडी के बिना कभी भी सीरिया में सीधा सैन्य हस्तक्षेप नहीं कर सकता था। विशेष कर इस लिए कि वाॅशिंग्टन और माॅस्को सीरिया में आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्यवाहियां कर रहे हैं। दूसरी ओर सीरिया की ज़मीनी सच्चाई यह है कि कुर्द बल अनेक उत्तरी क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में ले चुके हैं जो तुर्की के लिए चिंता का विषय है और इसी लिए उसने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप किया है लेकिन इसे दाइश के विरुद्ध कार्यवाही का नाम दिया है। तुर्की इस वजह से भी चिंतित है कि सीरिया में आतंकी गुटों को निरंतर पराजय हो रही है और वे तुर्की का रुख कर रहे हैं जिससे इस देश की सुरक्षा ख़तरे में पड़ गई है। सीरिया के कुर्द डेमोक्रिटिक यूनियन दल के प्रमुख सालेह मुस्लिम के इस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है कि सीरिया पर तुर्की की सैन्य चढ़ाई उसके सीरियाई दलदल में फंसने के समान है। (HN)