क़ुद्स जनान्दोलन की पहली वर्षगांठ
पहली अक्तूबर को क़ुद्स जनान्दोलन की पहली वर्षगांठ है जो अतिग्रहणकारी ज़ायोनियों के विरुद्ध आरंभ हुआ था।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान ज़ायोनियों द्वारा क़ुद्स और मस्जिदुल अक़सा पर बढ़ते हमलों के कारण क़ुद्स जनान्दोलन ने जन्म लिया जो अब भी जारी है। इस समय फ़िलिस्तीनी अपनी जान हथेली पर रखकर क़ुद्स जनान्दोलन को बड़ी वीरता के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। क़ुद्स अध्ययन केन्द्र की रिपोर्ट के अनुसार एक अक्तूबर 2015 से आरंभ होने वाले इस जनान्दोलन के आरंभ से अबतक 250 फ़िलिस्तीनी शहीद हो चुके हैं जबकि ज़ायोनियों की पाश्विक कार्यवाही के कारण 18 हज़ार से अधिक फ़िलिस्तीनी घायल हुए हैं। ज़ायोनी सैनिकों ने इस दौरान हज़ारों बार हमले करके प्रदर्शनकारी फिलिस्तीनियों को पकड़ने के प्रयास किये। क़ुद्स जनान्दोलन ने, जिसे तीसरा इन्तेफ़ाज़ा भी कहा जाता है, पुनः फ़िलिस्तीनियों की प्रतिरोधक शक्ति को स्पष्ट किया है।
फ़िलिस्तीनियों का क़ुद्स जनान्दोलन, उनके पिलछे आन्दोलनों की ही भांति है जिसका उद्देश्य, फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों विेशेषकर क़ुद्स को स्वतंत्र कराना है। इस जनान्दोलन के मुक़ाबले में अब तक ज़ायोनी शासन असहाय दिखाई दे रहा है। हालांकि ज़ायोनी शासन का यह सोचना है कि मध्यपूर्व में विवाद फैलाने वाली उसकी की नीतियों और कुछ अरब सरकारों द्वारा इस्नाईल के साथ सांठगांठ कर लेने से फि़लिस्तीनियों का जनान्दोलन कमज़ोर पड़ जाएगा।
क़ुद्स जनान्दोलन एेसी स्थिति में दूसरे वर्ष में प्रविष्ट हो रहा है कि जब ज़ायोनियों के विरुद्ध फ़िलिस्तीनियों की कार्यवाहियों का क्रम जारी है और फ़िलिस्तीनी युवाओं का कहना है कि अपने लक्ष्यों की प्राप्ति तक वे आन्दोलन को जारी रखेंगे। फ़िलिस्तीनियों ने यह दर्शा दिया है कि वे ज़ायोनी शासन की वर्चस्ववादी नीतियों को लागू नहीं होने देंगे। फ़िलिस्तीनियों का मानना है कि प्रतिरोध की उपलब्धियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि कड़े प्रतिरोध के माध्यम से ही ज़ायोनी शासन को परास्त किया जा सकता है।
फ़िलिस्तीन के परिवर्तनों की प्रक्रिया ने यह दर्शा दिया है कि उनके प्रतिरोध की प्रक्रिया न केवल यह कि समाप्त होने वाली नहीं है बल्कि चरणबद्ध ढंग से यह व्यापक एवं विस्तृत होती जाएगी।