रासुल हुसैन मस्जिद बंद न करे, मिस्रः नजफ़ के इमामे जुमा
नजफ़ के इमामे जुमा ने मिस्र से अपील की है कि वह क़ाहेरा में रासुल हुसैन मस्जिद बंद करने के अपने निर्णय को वापस ले।
सैयद सदरुद्दीन क़ुबांची ने मिस्र के वक़्फ़ विभाग से अपील की है कि वह राजधानी क़ाहेरा में सुरक्षा संबंधी ख़तरों के कारण नवीं और दसवीं मुहर्रम को रासुल हुसैन मस्जिद बंद करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे। उन्होंने कहा कि मिस्र के वक़्फ़ विभाग को सभी के साथ एक समान रवैया अपनाना चाहिए और उसे इस महान मस्जिद के अपने यहां स्थित होने पर गर्व करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमलावरों के मुक़ाबले में मस्जिद की रक्षा की जानी चाहिए, उसे बंद नहीं करना चाहिए। नजफ़ के इमामे जुमा ने कहा कि जो लोग दुश्मनी के कारण हिंसक कार्यवाही करते हैं उन्हें दंडित किया जाना चाहिए क्योंकि दुश्मनी व रक्तपात निंदनीय काम है।
उल्लेखनीय है कि इस बारे में इतिहासकारों के बीच मतभेद पाया जाता है कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का सिर कहां दफ़्न है? कुछ इतिहासकार यह मानते हैं कि वह दमिश्क़ में दफ़्न है जबकि कुछ का यह मानना है कि वह क़ाहिरा में रासुल हुसैन मस्जिद में दफ़्न है। यही कारण है कि मिस्र में रासुल हुसैन मस्जिद को विशेष महत्व प्राप्त है और मुहर्रम के दौरान विशेषकर 9 तथा 10 मुहर्रम को मित्रवासी बड़ी श्रद्धा के साथ वहां जाते हैं। वास्तविकता यह है कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का पवित्र सिर उनके पवित्र धड़ के साथ करबला में ही दफ़्न है।
ज्ञात रहे कि मिस्र के वहाबियों ने हाल ही में धमकी दी थी कि यदि शिया मुसलमानों ने रासुल हुसैन मस्जिद में 9 तथा 10 मुहर्रम को मजलिस या मातम किया तो उनपर हमले किये जाएंगे। (HN)