अमेरिका मध्यस्थ नहीं बल्कि अतिक्रमणकारी हैः अंसारुल्लाह
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अमेरिका यमन पर अतिक्रमण करने वाले देशों में था और वह यमनी सुरक्षा बलों और सऊदी अरब के बीच मध्यस्थ नहीं है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov २६, २०१६ १७:०१ Asia/Kolkata

अमेरिका यमन पर अतिक्रमण करने वाले देशों में था और वह यमनी सुरक्षा बलों और सऊदी अरब के बीच मध्यस्थ नहीं है।

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रवक्ता ने बल देकर कहा है कि अमेरिकी क्षेत्र में आग लगाने के लिए स्ट्रैटेजिक गेम खेल रहे हैं ताकि उनके प्रभाव और हस्तक्षेप के लिए भूमि प्रशस्त हो सके। मोहम्मद अब्दुस्सलाम ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी अपने हस्तक्षेप और प्रभाव यहां तक कि हथियारों को क्षेत्र में बेचने को जारी रखने के प्रयास में हैं।

अंसारुल्लाह आंदोलन के आधिकारिक प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुस्सलाम ने यमन संकट के संबंध में अमेरिका की नकारात्मक भूमिका के बारे में भी कहा कि अमेरिका यमन पर अतिक्रमण करने वाले देशों में था और वह यमनी सुरक्षा बलों और सऊदी अरब के बीच मध्यस्थ नहीं है।

यमन संकट के समाधान की दिशा में संयुक्त राष्ट्रसंघ की गतिविधियों में अमेरिका ने जो विध्न उत्पन्न किया है उसके दृष्टिगत अमेरिका की नकारात्मक भूमिका पहले से अधिक स्पष्ट हो जाती है।

यमन संकट के समाधान की दिशा में राष्ट्रसंघ की कार्यवाहियां, प्रतिक्रियाएं और उससे संबंधित अधिकारियों के बयान इस बात के सूचक हैं कि यमन संकट के समाधान में उसे बंद गली का सामना है और वह अमेरिका और सऊदी अरब की विशिष्टता पर आधारित नीतियों का अनुपालन कर रहा है।

यह ऐसी स्थिति में है कि आजकल यमन मामलों में संयुक्त राष्ट्रसंघ के विशेष दूत के रूप में इस्माईल वलद शेख का नाम यहां तक कि खबरों में भी कम लिया जा रहा है और यमन संकट के समाधान के संबंध में अमेरिकी विदेशमंत्री जॉन केरी ने जो सुझाव दिया है अधिकतर उसी की बात यमन संकट के संबंध में रोड मैप के रूप में की जा रही है।

राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि इस्माईल वलद शैख की उपस्थिति के महत्वहीन हो जाने का अर्थ यह हो सकता है कि अमेरिकियों ने अमली और आधिकारिक तौर पर यमन विषय को अपने हाथ में ले लिया है और पहले से अधिक उस पर अपने दृष्टिकोण थोप रहे हैं। MM