सीरियाः चरमपंथियों और उनके समर्थकों को सीरियाई बलों ने सबक़ सिखाया
https://parstoday.ir/hi/news/west_asia-i29902-सीरियाः_चरमपंथियों_और_उनके_समर्थकों_को_सीरियाई_बलों_ने_सबक़_सिखाया
सीरिया में चरमपंथी संगठनों और उनके समर्थकों को करारी हार कर सामना करना पड़ा है।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Nov २८, २०१६ १५:५९ Asia/Kolkata
  • सीरियाः चरमपंथियों और उनके समर्थकों को सीरियाई बलों ने सबक़ सिखाया

सीरिया में चरमपंथी संगठनों और उनके समर्थकों को करारी हार कर सामना करना पड़ा है।

एक ओर जहां पूर्वी हलब में चरमपंथी संगठनों के नियंत्रण से महत्वपूर्ण इलाक़े निकल गए हैं वहीं सीरियाई सेना और कुर्द फ़ोर्सेज़ के के बीच तुर्की का मिलकर मुक़ाबला करने पर सहमति बनी है जो सीरिया की सीमा में घुसा हुआ है और चरमपंथी संगठनों की मदद कर रहा है।

सीरियाई कुद्रों के डेमोक्रेटिक एलायंस और सीरियाई सेना के बीच यह सहमति बनी है कि उत्तरी सीरिया में घुसी तुर्क सेना को बाहर निकाला जाए।

कुर्द बलों ने कहा है कि सहमति के आधार पर कुर्द फ़ोर्सेज़ सीरियाई सेना के साथ मिलकर अलबाब शहर से तुर्क सैनिकों को मार भगाने के लिए हमले करेंगी। कुर्द फ़ोर्सेज़ और सीरियाई सेना के बीच यह समझौता रूस की मध्यस्थता से हुआ है। सीरियाई सेना और कुर्द फ़ोर्सेज़ अलबाब शहर को दाइश के क़ब्ज़े से मुक्त करवाएंगी और शहर के आसपास मौजूद तुर्क सेना को वहां से मार भगाएंगी जो इस शहर पर क़ब्ज़ा करने के प्रयास में है।

सीरिया के विदेश उपमंत्री फ़ैसल मेक़दाद ने कहा कि तुर्की क्षेत्र में तनाव और संकट का असली वजह है इस देश को चाहिए कि अपनी सेना तत्काल सीरिया से बाहर निकाले। फ़ैसल मेक़दाद ने कहा कि यदि सीरियाई की धरती के एक भाग पर तुर्क सेना का क़ब्ज़ा जारी रहेगा तो क्षेत्र में शांति नहीं आ सकती।

सीरियाई सेना ने कहा है कि अलबाब शहर पर किसी भी विदेशी सेना को क़ब्ज़ा नहीं करने दिया जाएगा।

दूसरी ओर पूर्वी हलब में चरमपंथी संगठनों को भारी पराजय का सामना करना पड़ा है और पूर्वी हलब का पूरा उत्तरी भाग चरपमंथियों के क़ब्ज़ा से आज़ाद होकर सीरियाई सेना के नियंत्रण में चला गया है। साख़ूर और हैदरिया जैसे स्ट्रैटेजिक क्षेत्रों से चरमपंथियों को मार भगाया गया है जिसे चरमपंथियों के लिए वर्ष 2012 में हलब पर उनका क़ब्ज़ा होने के बाद सबसे बड़ी पराजय माना जा रहा है।

इसी बीच सीरिया के सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट ने एक बयान में कहा है कि इस मंत्रालय की वेबसाइट हैक कर ली गई थी और हैक करने के बाद यह अफ़वाह फैलाई गई कि राष्ट्रपति बश्शार असद ख़तरनाक संक्रामक रोग में ग्रसित हो गए हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन ख़बरों में कोई सच्चाई नहीं है।