यमन में राष्ट्रीय मुक्ति सरकार का गठन हो गया
अमेरिका तथा सऊदी अरब इस प्रकार की प्रक्रिया को पसंद नहीं करते हैं क्योंकि यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार के गठन को वाशिंग्टन और रियाज़ के एक अन्य षडयंत्र की विफलता के रूप में देखा जा रहा है
यमन की उच्च क्रांति परिषद के प्रमुख ने यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार के गठन को इस देश की बड़ी उपलब्धि बताया है।
मोहम्मद अली अलहूसी ने यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार की छत्रछाया में इस देश की आर्थिक स्थिति के बेहतर होने की आशा जताई है और यमनी सेना और जनता का आर्थिक युद्ध के आयामों के समझने का आह्वान किया है।
यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार का दायित्व, जिसका बहुत ही कठिन परिस्थिति में गठन हुआ है, इस देश की राजनीतिक, आर्थिक और सैनिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करना है।
यमन की इस सरकार का गठन, राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में इस देश के राजनीतिक भविष्य में बहुत प्रभावी हो सकता है।
यमन की उच्च क्रांति परिषद की ओर से इस देश की सरकार का गठन सऊदी अरब और उसके पिछलग्गूओं के षडयंत्रों के मुकाबले में समय पर उठाया गया समझदारी भरा कदम है क्योंकि अतिक्रमणकारी सऊदी अरब और उसके पिछलग्गू इस चेष्टा में थे कि यमन में कोई सरकार न रहे।
उल्लेखनीय है कि यमन के राष्ट्रपति मंसूर हादी के दिखावटी व पहले से तय त्यागपत्र के अंतर्गत व्यवहारिक रूप से यमन में राजनीतिक शून्य था और यह विषय इस बात का कारण बना था कि विभिन्न क्षेत्रों में लिये जाने वाले निर्णयों को समस्याओं का सामना था।
इस प्रकार की परिस्थिति में यमन की उच्च क्रांति परिषद ने अंसारुल्लाह आंदोलन और यमन की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की सहमति से यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार का गठन किया है और नई सरकार के मंत्रिमंडल के गठन में भी वह उल्लेखनीय भूमिका निभायेगी।
यमन की उच्च राजनीतिक परिषद और उसके बाद यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार का गठन का परिणाम यह होगा कि मंसूर हादी या सऊदी अरब से संबंधित दूसरे गुट दोबारा सत्ता में नहीं आ सकेंगे।
अपेक्षा के अनुसार यमन की उच्च राजनीतिक परिषद को यमन की अपदस्थ सरकार और सऊदी अरब के विरोधों का सामना है और अमेरिका तथा सऊदी अरब इस प्रकार की प्रक्रिया को पसंद नहीं करते हैं क्योंकि यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार के गठन को वाशिंग्टन और रियाज़ के एक अन्य षडयंत्र की विफलता के रूप में देखा जा रहा है। MM