आस्ताना वार्ता में किन लक्ष्यों पर है सीरियाई सरकार की नज़र?
आगामी 23 और 24 जनवरी को क़ज़ाक़िस्तान की राजधानी आस्ताना में सीरियाई सरकार तथा विरोधी संगठनों की बैठक होने जा रही है।
इस बीच सीरियाई सरकार देश के भीतर सैनिक स्तर पर बड़ी सफलताएं अर्जित करके वार्ता की मेज़ पर अपनी स्थिति मज़बूत करने के प्रयास में लगी हुई है।
सीरियाई पक्षों की बैठक कई देशों की निगरानी में हो रही है। बैठक एसे समय में हो रही है कि जब देश के भीतर आतंकी संगठनों तथा विरोधी संगठनों के मुक़ाबले में सरकार की स्थिति काफ़ी मज़बूत हो गई है और यह आस्ताना बैठका का बहुत महत्वपूर्ण पहलू है।
दिसम्बर 2016 में सीरियाई सरकार ने अपने घटकों के साथ मिलकर हलब नगर को आतंकियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करा लिया जिसके बाद आतंकियों के विरुद्ध अभियान में नई तेज़ी आ गई है। इस समय हुम्स के पूर्वी क्षेत्रों और दैरुज़्ज़ूर प्रांत में भी लड़ाई चल रही है लेकिन सीरिया सेना तथा घटक बल हलब शहर के आस पास के क्षेत्रों से आतंकियों को खदेड़ने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
इससे पहले युद्ध विराम के समझौते के बाद चरमपंथियों की ओर से बार बार उल्लंघन हुआ तो सवाल यह है कि इस समय सीरियाई सरकार वार्ता की मेज़ पर क्यों बैठ रही है?
टीकाकारों का मानना है कि सीरियाई सरकार आस्ताना में होने जा रही वार्ता में राजनैतिक लक्ष्य साधना चाहती है। सरकार यह चाहती है कि स्थायी संघर्ष विराम लागू हो, पीड़ितों तक मानवता प्रेमी सहायता पहुंचे तथा हथियार उठा लेने वाले संगठन हथियार डालकर राष्ट्रीय संधि से जुड़ें। यह तीनों ही लक्ष्य सीरियाई सरकार के लिए बड़ा महत्व रखते हैं। क्योंकि इन लक्ष्यों की प्राप्ति के बाद आतंकी संगठनों में शामिल हो जाने वाले तत्वों का मनोबल गिरेगा और वह इन संगठनों से दूरी बना लेंगे।
दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गोटेरस ने सीरिया संकट तथा आस्ताना वार्ता के संबंध में अपने बयान में कहा कि सीरिया में झड़पों से उत्पन्न होने वाले ख़तरे बहुत गंभीर हैं अतः संकट को हल करने के लिए वार्ता जारी रहना ज़रूरी है। गोटेरस से ज़्यादा सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार असद को यह आभास है कि देश के विभिन्न भागों में आतंकी संगठन किसी भी अपराधिक कार्यवाही में संकोच नहीं करते और वार्ता के माध्यम से नए दरवाज़े खुल सकते हैं।