सीरिया संकट और जनेवा वार्ता
सीरिया के राजदूत ने कहा है कि सीरिया के गुटों के बीच जनेवा वार्ता का नया चरण विलंबित हो गया है।
दिसंबर सन 2016 में हलब की स्वतंत्रता के साथ ही सीरिया के परिवर्तन, नए चरण में प्रविष्ट हो गए हैं। 29 दिसंबर से सीरिया में युद्धविराम आरंभ हुआ था। 23 और 24 जनवरी को सीरिया संकट के संदर्भ में आस्ताना में वार्ता हुई थी। आस्ताना बैठक से पहले तय यह हुआ था कि आठ फरवरी 2017 को जनेवा में सीरिया के बारे में बैठक होगी। हालांकि रूस में सीरिया के राजदूत रेयाज़ हद्दाद ने बताया है कि यह बैठक फिलहाल विलंबित हो गई है।सीरिया के बारे में संयुक्त राष्ट्रसंघ के दूत दिमिस्तूरा ने कहा है कि जनेवा बैठक के विलंबित होने का कारण यह है कि अभी इसकी तैयारी पूरी नहीं हो सकी है।
वैसे भी इस बात की पहले से संभावना पाई जाती थी कि शायद जनेवा बैठक के आयोजन में कुछ विलंब हो। इसका कारण यह है कि हलब की स्वतंत्रता के बाद सीरिया संकट के मुख्य संचालकों की स्थिति बदल चुकी है। आसताना बैठक में यह बात स्पष्ट रूप में दिखाई दी थी। अब एेसा हो गया है अमरीका, योरोपीय संघ और सीरिया सरकार के विरोधी अरब देश अब सीरिया संकट के संबन्ध में हाशिये पर आ गए हैं। वर्तमान समय में रूस, ईरान और किसी सीमा तक तुर्की, जनेवा वार्ता के लिए पूरी तरह से तैयार हैं जबकि सीरिया के विरोधियों के पास जनेवा वार्ता के लिए कोई ठोस कार्यक्रम नहीं है।
जनेवा वार्ता के विलंबित होने का एक कारण यह है कि सीरिया की शासन व्यवस्था के विरोधी गुटों में आपस में गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए हैं। सीरिया सरकार के विरोधी गुटों के गठबंधन के प्रमुख मुहम्मद अल्लूश ने आस्ताना बैठक में कहा था कि हमले अभी तक जनेवा वार्ता के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है किंतु हम इसकी समीक्षा करेंगे। टीकाकारों का यह कहना है कि सीरिया की वर्तमान स्थिति के दृष्टिगत कमज़ोर हो रहे बश्शार असद के विरोधी अब जनेवा वार्ता में भाग लेने से आनाकानी कर रहे हैं।