पाकिस्तान में भी फिलिस्तीनी दूतावास खुला
इस विषय ने फिलिस्तीनी प्रतिरोध की उपलब्धियों को पहले से अधिक स्पष्ट कर दिया।
पहली फरवरी को फिलिस्तीनी और पाकिस्तानी अधिकारियों की उपस्थिति में इस्लामाबाद में फिलिस्तीनी दूतावास का उद्घाटन हुआ।
कूटनयिक मामलों में फिलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख के सलाहकार मज्दी अलखालेदी ने पाकिस्तान में फिलिस्तीनी दूतावास के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि इस दूतावास के उद्घाटन से विश्व में फिलिस्तीन के दूतावासों की संख्या 90 हो गयी है।
हालिया वर्षों में फिलिस्तीनी परिवर्तन कूटनयिक मंच पर भी फिलिस्तीनियों को नई सफलताएं मिलने के सूचक हैं। हालिया वर्षों में फिलिस्तीनी प्रतिरोध ने सैनिक क्षेत्र में जायोनी शासन को कई बार पराजित किया।
वर्ष 2008 में 22 दिवसीय युद्ध, वर्ष 2012 में आठ दिवसीय युद्ध और वर्ष 2014 में पचास दिवसीय युद्ध में जायोनी शासन को मिलने वाली पराजय को इसी दिशा में देखा जा सकता है और इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समस्त समीकरणों को फिलिस्तीन के हित में कर दिया।
वर्ष 2012 में संयुक्त राष्ट्रसंघ में फिलिस्तीन को पर्यवेक्षक का दर्जा दे दिया गया और यह दर्जा उसे आठ दिवसीय युद्ध में जायोनी शासन को मिलने वाली पराजय के बाद दिया गया और इस विषय ने फिलिस्तीनी प्रतिरोध की उपलब्धियों को पहले से अधिक स्पष्ट कर दिया।
ध्यान योग्य बिन्दु यह है कि अभी हाल ही में सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पारित किया गया और उसमें जायोनी शासन द्वारा अवैध अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जायोनी कालोनियों के निर्माण को ग़ैर कानूनी बताया गया और इस्राईल की भर्त्सना की गयी परंतु अमेरिका ने जायोनी शासन के विरुद्ध पारित होने वाले प्रस्ताव को वीटो नहीं किया और वोटिंग के दौरान वह अनुपस्थित रहा और इस संबंध में अमेरिका के पीछे हटने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत प्रतिक्रिया हुई थी।
फिलिस्तीनियों द्वारा अपना भविष्य निर्धारित किये जाने पर विश्व समुदाय के एकमत होने का अर्थ फिलिस्तीनियों के हड़पे गये अधिकारों की वापसी के अधिकार की पुष्टि है।
साथ ही उसका अर्थ यह है कि विश्व समुदाय को इस्राईली अतिग्रहण के जारी रहने पर आपत्ति है। बहरहाल अंतरराष्ट्रीय परिवर्तन और विश्व समुदाय द्वारा पहले से अधिक फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों पर ध्यान दिया जाना फिलिस्तीन विरोधी अमेरिका की नीतियों की विफलता का सूचक है। MM