गुटेरेस का सऊदी अरब का दौरा उनके घोषित दृष्टिकोण से विरोधाभास
गुटेरेस का सऊदी अरब का दौरा उनके घोषित दृष्टिकोण से विरोधाभास
संयुक्त राष्ट्र संघ के नए महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का तुर्की में विचार विमर्श के बाद सऊदी अरब और क़तर का उनका प्रस्तावित दौरा उनकी घोषित नीतियों से विरोधाभास रखता है, क्योंकि सऊदी अरब और क़तर ही क्षेत्र सहित दुनिया में अशांति की मुख्य जड़ हैं। गुटेरेस ने शुक्रवार को शनिवार को तुर्की के अधिकारियों के साथ मुलाकात में सीरिया संकट सहित क्षेत्र के हालात के बारे में चर्चा की और पश्चिम एशिया में विचार-विमर्श के क्रम को जारी रखने के लिए वे सऊदी अरब से शुरुआत कर रहे हैं।
गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में अपने कार्यकाल के पहले दिन कहा था कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में हिंसा व झड़प के शिकार दसियों लाख लोगों की मदद करना उनकी प्राथमिकता है।
दुनिया के हालात के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के व्यवहार पर उन देशों के राजनैतिक व वित्तीय प्रभाव हैं जो ख़ुद दुनिया की समस्याओं को जन्म देने वालों में हैं और इसी व्यवहार के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव बान की मून के कार्यकाल में सऊदी अरब का नाम युद्ध के दौरान बाल अधिकार का हनन करने वाले देशों की सूचि से ख़ारिज हो गया और अब गुटेरेस का यूएन के महासचिव के रूप में कार्यकाल संभालने के बाद पश्चिम एशिया में सऊदी अरब का पहले गंतव्य के रूप में सफ़र करना यह दर्शाता है कि वह भी बान मून के ही नक़्शे क़दम पर चल रहे हैं।
सऊदी अरब आतंकवाद के प्रकट होने का स्रोत है और वहाबी विचारधारा ही इस बुराई को फैलाती है। जैसा कि इन दिनों सीरिया, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान तथा यूरोपीय देशों में भी सऊदी समर्थित आतंकवादी उत्पात मचाए हुए हैं।
अमरीका और ब्रिटेन के समर्थन से यमन पर सऊदी अरब का हमला और यमनियों के जनसंहार में प्रतिबंधित हथियारों के इस्तेमाल के कारण, जनमत के सामने संयुक्त राष्ट्र संघ के नए महासचिव की ज़िम्मेदारी पहले से ज़्यादा बढ़ गयी है। (MAQ/T)