बिना बयान जारी किए आस्ताना-2 बैठक संपन्न
अपेक्षा के अनुसार ही सीरिया के बारे में होने वाली आस्ताना-2 वार्ता तुर्की की ओर से डाली जाने वाली रुकावटों के कारण बिना कोई बयान जारी किए समाप्त हो गई है।
आस्ताना-2 वार्ता एेसी स्थिति में आयोजित हुई कि जब सीरिया सरकार के विरोधी ख़ैमे में मतभेद, वार्ता के आयोजन से पहले ही खुल कर सामने आ गए थे। मुख्य विवाद इस वार्ता में शामिल होने वाले सरकार विरोधी दल के सदस्यों को लेकर था। सरकार विरोधियों को इस बात पर आपत्ति थी कि टीम में शामिल अधिकतर सदस्य वे लोग हैं जो तुर्की के ख़ैमे के हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि आस्ताना-2 बैठक में सरकार विरोधियों के समर्थन में तुर्की की बड़ी अहम भूमिका थी। इस वार्ता के आयोजन की प्रक्रिया से भी स्पष्ट होता कि अन्कारा शुरू से ही इसे विफल बनाने की कोशिश कर रहा था। इस वार्ता में सीरिया सरकार के प्रतिनिधि बश्शार जाफ़री ने भी इस बात की ओर संकेत करते हुए कहा है कि चूंकि तुर्क प्रतिनिधि मंडल विलम्ब से वार्ता में शामिल हुआ इस लिए उसने बैठक का घोषणापत्र जारी करने में रुकावट डाल दी।
आस्ताना-2 बैठक में जिस विषय की समीक्षा नहीं की गई, वह सीरिया का नया संविधान था। इसके दो कारण हैं। एक ओर वार्ता में सीरिया सरकार के प्रतिनिधियों के प्रमुख बश्शार जाफ़री ने संविधान की समीक्षा को आंतरिक मामला बताया और दूसरी ओर तुर्क शिष्ट मंडल भी सीरिया के लिए फ़ेडरल व्यवस्था के निर्धारण जैसी नए संविधान की कुछ धाराओं का विरोधी था। नए संविधान का मसौदा रूस ने तैयार किया था। एक अन्य बात यह भी है कि 23 फ़रवरी को निर्धारित जेनेवा वार्ता के आयोजन के बारे में भी कुछ शंकाएं पाई जाती हैं। इस बारे में बश्शार जाफ़री का कहना था कि यह तय पाया है कि एक महीने के भीतर सीरिया के बारे में दूसरी बैठक का आयोजन किया जाएगा लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह विषय जेनेवा वार्ता को रद्द करने के अर्थ में है या नहीं? (HN)