इस्राईल और तकफ़ीरी आतंकवाद, एक सिक्के के दो रुख़
इस्राईल के पूर्व युद्ध मंत्री ने यह बात खुलकर स्वीकार की है कि ज़ायोनी शासन सीरिया में सक्रिय तकफ़ीरी विचारधारा वाले गुटों का समर्थन करता है।
इस्राईल के पूर्व युद्ध मंत्री ने यह बात खुलकर स्वीकार की है कि ज़ायोनी शासन सीरिया में सक्रिय तकफ़ीरी विचारधारा वाले गुटों का समर्थन करता है। इसी बीच ज़ायोनी शासन के टैलिविज़न ने एक रिपोर्ट में बताया है कि वर्तमान समय में इस्राईल और अरब देशों के संबन्ध इतने आगे बढ़ चुके हैं कि अरबों ने फ़िलिस्तीनियों को लगभग अकेला छोड़ दिया है और साथ ही ईरान की शत्रुता को केन्द्र बनाकर वे संयुक्त रूप में आगे की ओर बढ़ रहे है।
इस्राईल के पूर्व युद्धमंत्री की इस स्वीकारोक्ति से यह बात समझ में आती है कि ज़ायोनी शासन अब अरब देशों के साथ अपने कूटनीतिक संबन्धों को छिपा नहीं रहा है बल्कि उनको सार्वजनिक करके यह सिद्ध करने के प्रयास में है कि मानो अरब देश अब फ़िलिस्तीन को छोड़ चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार फ़िलिस्तीनियों को हमेशा के लिए छोड़ने और उनका समर्थन बंद करने के मार्ग में अरब देशों के सामने कुछ समस्याएं और बाधाएं मौजूद हैं किंतु इस्राईल के लिए यह कोई चिंता की बात नहीं है। इस्राईल के पूर्व युद्धमंत्री यदि ज़ायोनी शासन और बहाबी अतिवादी गुटों के बीच सांठगांठ की बात को स्वीकार न भी करते तो भी यह बात अब सबके लिए स्पष्ट हो चुकी है कि दोनो पक्षों में कितनी घनिष्ठ मित्रता है।
इस्राईल के एक अस्पताल में नेतनयाहू द्वारा घायल तकफीरी आतंकवादियों से भेंट और इस्राईली अस्पतालों में दाइशी आतंकियों का उपचार वे बाते हैं जो इस्राईल और तकफ़ीरी आतंकवादियों के बीच मैत्रीपूर्ण संबन्धों को स्पष्ट करते हैं। वास्तविकता यह है कि इस्राईल और तकफ़ीरी आतंकवाद, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
इसके अतिरिक्त प्राप्त रिपोर्ट से यह पता चलता है कि इस्राईल के कुछ रक्षा विशेषज्ञ, सीरिया के भीतर अमरीका और फ़्रांस के जासूसों के रूप में सक्रिय हैं जो व्यवहारिक रूप में तकफ़ीरी आतंकवादी गुटों की सहायता कर रहे हैं। इसी बीच हलब में आतंकवादी अड्डे ध्वस्त होने के बाद सीरिया के सैनिकों को जो प्रमाण मिले हैं उनसे इस्राईल की गुप्तचर सेवा मोसाद और तकफ़ीरी आतंकवादी गुटों के बीच निकट संपर्क की बात स्पष्ट होती है।
उधर ज़ायोनी शासन के लिए यह चिंता का विषय है कि हर प्रकार के समर्थन के बावजूद तकफ़ीरी आतंकवादी गुटों को निरंतर विफलता का मुंह देख रहे हैं। ज़ायोनियों ने तकफीरी आतंकवादियों को इस प्रकार से प्रशिक्षित किया था कि वे किसी भी देश की सेना को आसानी से टक्कर दे सकते थे लेकिन सीरिया और इराक़ में जो हो रहा है वह इसके बिल्कुल विपरीत है। अब वाइट हाउस में ट्रम्प के पहुंचने के बाद एसेा लगता है कि आतंकवादी गुटों की एक नई खेप तैयार की जा रही है। सऊदी अरब के विदेशमंत्री आदिल जलजुबैर द्वारा यह प्रस्ताव पेश करना की सीरिया की सत्ता वहां पर सक्रिय आतंकवादियों के हवाले कर दी जाए और साथ ही तुर्की की ओर से आतंकवादियों का समर्थन यह दर्शाता है कि सीरिया के लिए नया षडयंत्र रचा जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री की अमरीका, तुर्की और मनामा की यात्रा और उसके बाद वाशिग्टन में ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतनयाहू और ट्रम्प एंव उनके सलाहकार के बीच भेंटवार्ता कुछ नए परिवर्तनों की सूचक है। इन सारी बातों के बावजूद यह स्पष्ट है कि ज़ायोनी शासन के प्रशिक्षित वहाबी विचारधारा के गुट सीरिया और इराक़ में लगातार पराजय का स्वाद चख रहे हैं जिसकी वजह से इन गुटों से अधिक इस्राईल हताश और निराश है क्योंकि ज़ायोनी शासन और तकफ़ीरी आतंकवादी गुट एक ही सिक्के के दो रुख़ हैं।