तुर्की ने जो बोया अब वही काट रहा है
जेनेवा में सीरिया वार्ता में सीरियाई सरकार के वार्ताकार दल के प्रमुख बशार जाफ़री ने कहा है कि तुर्की ने सीरिया में हिंसा फैलाने और जनता का नरसंहार करने के लिए 3 लाख आतंकवादियों को सीरिया भेजा है।
बशार जाफ़री का कहना है कि सीरियाई जनता के दुखों और समस्याओं का प्रमुख कारण तुर्की है। तुर्की ने सीरिया के विरोधी तकफ़ीरी आतंवादियों को इस्तांबूल में पनाह दे रखी है और अब वह सीरियाई जनता के हक़ में किए जाने वाले अत्याचारों का नतीजा भुगत रहा है। आतंकवादियों ने तुर्की सैन्य अधिकारियों से आतंकवादी कार्यवाहियों के लिए प्रशिक्षण लिया और अब ख़ुद इसी देश में हिंसात्मक कार्यवाहियां अजांम दे रहे हैं और तुर्की अधिकारी उन्हें निंयत्रण करने में नाकाम रहे हैं।
सीरियाई संकट ने उन क्षेत्रीय देशों के चेहरे से नक़ाब खींच ली है, जो इस्लामी जगत का ठेकेदार होने का दावा करते हैं और इस्लामी जगत के सबसे बड़े दुश्मन इस्राईल को अपना दुश्मन बताते हैं। इन्हीं देशों में से एक तुर्की है।
सीरिया का संकट पिछले 6 वर्षों से जारी है और इसके लिए ज़िम्मेदार देशों विशेष रूप से तुर्की की भूमिका की अब अच्छी तरह समीक्षा की जा सकती है। 2011 में तुर्की ने सऊदी अरब के साथ क़दम से क़दम मिलाना शुरू कर दिया और पश्चिमी देशों के दबाव में आकर एक ऐतिहासिक ग़लती की। तुर्की ने सऊदी अरब और अमरीका, फ़्रांस और ब्रिटेन की हां में हां मिलाकर ताक़त के बल पर बशार असद की सरकार को गिराने के लिए ताल ठोंक दी।
अंकारा ने कई सीरिया विरोधी सम्मेलनों की मेज़बानी की और दुनिया भर से सीरिया जाने वाले आतंकवादियों के लिए अपनी सीमाएं खोल दीं।
आज दुनिया देख रही है कि सीरिया और इराक़ में आतंकवादी एक के बाद एक इलाक़े से पराजित होकर पीछे हट रहे हैं और तुर्की में बड़ी बड़ी आतंकवादी कार्यवाहियां अंजाम दे रहे हैं।