सीरिया धमाके, वार्ता की विफलता का परिणाम
एेसी स्थिति में कि जब सीरिया के बारे में आस्ताना तीन वार्ता विफल हो गयी है, देश में आतंकवादी हमलों में अचानक वृद्धि हो गयी है।
सीरिया की राजधानी दमिश्क़ में बुधवार को काफ़ी समय के बाद आतंवादी हमले हुए। बुधवार को सीरिया की राजधानी दमिश्क़ में न्यायमंत्रालय की एक इमारत में आत्मघाती हमला हुआ जिसमें कम से कम 34 लोग हताहत और दसियों अन्य घायल हो गये जबकि दूसरा धमाका दमिश्क़ के बाहरी क्षेत्र रबवा में एक रेस्त्रां में हुआ। यह धमाके एेसी स्थिति में हुए कि पिछले सोमवार को ही इराक़ी तीर्थयात्रियों की बस में धमाका हुआ जिसमें 74 से अधिक लोग हताहत और दसियों अन्य घायल हो गये।
दमिश्क़ में होने वाले हालिया आतंकी हमलों का मुख्य कारण आस्ताना और जेनेवा वार्ता की विफलता बताया जा रहा है। यह एेसी स्थिति में है कि पहली और दूसरी आस्ताना तथा चौथी जेनेवा वार्ता का परिणाम तुर्की और सीरिया सरकार के विरोधियों के उल्लंघनों के कारण कुछ ख़ास नहीं रहा। 15 मार्च को होने वाली आस्ताना-3 वार्ता दो दिन बाद समाप्त हो गयी और इसमें सरकार विरोधी प्रतिनिधि मंडल ने भाग नहीं लिया। विरोधियों के भाग न लेने से वार्ता न केवल विफल हो गयी बल्कि सीरिया में एक बार फिर अशांति ने सिर उठा लिया और दमिश्क़ में होने वाले आतंकवादी हमलों को सरकार विरोधियों का ही षड्यंत्र कहा जा रहा है। सीरिया सरकार के विरोधी इन धमाकों से यह संदेश देना चाहते हैं कि वह अब भी सीरिया में पूरी गंभीरता और ख़तरे के साथ मौजूद हैं।
कहा जा सकता है कि सीरिया संकट के दो रुख़ हैं वार्ता और आतंकवाद। जब वार्ता परिणामहीन होगी तो आतंकवादी हमले विस्तृत पैमाने पर होंगे। दमिश्क़ के हालिया आतंकवादी हमले, आस्ताना में होने वाली तीन वार्ताओं और जेनेवा-4 वार्ता की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक अर्थात संघर्ष विराम को प्रभावित कर सकते हैं। आस्ताना-3 वार्ता में जब सीरिया सरकार के विरोधियों ने भाग नहीं लिया तो इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि 23 मार्च को जेनेवा-5 वार्ता और तीन और चार मई को होने वाली आस्ताना-4 वार्ता, सीरिया संकट के लिए कोई ख़ास परिणाम नहीं दे पाएगी। (AK)