रूस व यूरोप के संसदीय दल की सीरिया यात्रा
https://parstoday.ir/hi/news/west_asia-i38680-रूस_व_यूरोप_के_संसदीय_दल_की_सीरिया_यात्रा
रूस व यूरोप के एक संयुक्त संसदीय दल ने सोमवार को दमिश्क़ की यात्रा की। रूस के उप संसद सभापति विलादिमीर वासीलीफ़ के नेतृत्व में यात्रा करने वाले इस दल ने सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद से मुलाक़ात की जिसमें दोनों पक्षों ने सीरिया के वर्तमान सुरक्षा व राजनैतिक हालात पर चर्चा की।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar २१, २०१७ १४:१२ Asia/Kolkata

रूस व यूरोप के एक संयुक्त संसदीय दल ने सोमवार को दमिश्क़ की यात्रा की। रूस के उप संसद सभापति विलादिमीर वासीलीफ़ के नेतृत्व में यात्रा करने वाले इस दल ने सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद से मुलाक़ात की जिसमें दोनों पक्षों ने सीरिया के वर्तमान सुरक्षा व राजनैतिक हालात पर चर्चा की।

पिछले सात साल से जारी सीरिया संकट के दौरान यह रूस और यूरोप के किसी संयुक्त संसदीय दल की पहली सीरिया यात्रा है। इस प्रतिनिधि मंडल में रूस की संसद के चारों धड़ों के प्रतिनिधि और यूरोपी संसद के दस सदस्य शामिल हैं। पिछले वर्षों में रूस के अनेक संसदीय दल सीरिया की स्थिति की समीक्षा और इस देश के अधिकारियों से वार्ता के लिए दमिश्क़ की यात्रा कर चुके हैं और इसी तरह यूरोपीय संसद और यूरोपीय देशों की संसदों के प्रतिनिधि भी यूरोपीय संघ की ओर से नहीं लेकिन व्यक्तिगत रूप से सीरिया की यात्रा कर चुके हैं लेकिन रूस और यूरोप के एक संयुक्त संसदीय प्रतिनिधि मंडल का गठन और उसकी सीरिया यात्रा एक अभूतपूर्व घटना है।

 

सीरिया सरकार के संबंध में यूरोप की नीति में परिवर्तन का एक कारण, उन्हीं तकफ़ीरी आतंकी गुटों विशेष कर दाइश की ओर से यूरोप के लिए ख़तरा उत्पन्न होना है जिनका सीधा समर्थन यूरोप करता रहा है। इस समय यूरोपीय देशों में तकफ़ीरी गुटों की कार्यवाहियों के परिणाम दो अलग-अलग रूपों में सामने आए हैं। पहला परिणाम दसियों लाख की संख्या में शरणार्थियों का रेला यूरोप पहुंचने के रूप में सामने आया है जो इराक़, सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों में आतंकियों की पाश्विक कार्यवाहियों के कारण अपना देश छोड़ रहे हैं। यह संकट जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के शब्दों में यूरोप के लिए वर्तमान समय में सबसे बड़ी चुनौती है। दूसरा परिणाम फ़्रान्स, जर्मनी और बेल्जियम जैसे देशों में आतंकी कार्यवाहियों में अभूतपूर्व वृद्धि है। वास्तव में यूरोप वालों ने यह सोचा भी नहीं था कि उनके द्वारा आतंकी गुटों का गठन और उनका समर्थन एक दिन ख़ुद उनके लिए ख़तरा बन जाएगा। वास्तविकता यह है कि आज कुछ यूरोपीय सरकारें, वही काट रही हैं जो उन्होंने मध्यपूर्व में आतंकवाद के बीज के रूप में बोया था। (HN)