यमन, सऊदी अरब के विध्वंसक बमों के परीक्षण स्थल में परिवर्तित
यमन की उच्च राजनैतिक परिषद के उप प्रमुख ने कहा है कि सऊदी अरब ने अपने पश्चिमी व अरब घटकों के साथ मिल कर यमन को अपने विध्वंसक बमों के लिए परीक्षण स्थल में बदल दिया है।
क़ासिम लबूज़ा ने कहा है कि आले सऊदी और उसके घटकों ने प्रतिबंधित हथियार इस्तेमाल करके यमन में जो अपराध किए हैं उन्हें इतिहास के पन्नों से कभी मिटाया नहीं जा सकेगा और यह पूरी मानवता के लिए कलंक है। यमन के अधिकांश क्षेत्रों पर सऊदी अरब ने बमबारी की है और इस देश के अधिकतर पुल, स्कूल, अस्पताल और सरकारी इमारतें सऊदी अरब के हमलों का निशाना बनी हैं। यमन के बुनियादी ढांचे को इस बमबारी से जो नुक़सान पहुंचा है वह कई अरब डाॅलर का है और अगर इस ढांचे का पुनर्निर्माण किया जाए तो इसके लिए दसियों साल का समय लगेंगे। यह एेसी स्थिति में है कि जब संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद की ओर से यमन संकट की अनदेखी, यमन में हर प्रकार का अपराध करने और सभी अंतर्राष्ट्रीय नियमों और संधियों को रौंदने के लिए सऊदी अरब को हरी झंडी दिखाने के समान है।
इन हालात में सऊदी अरब के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र संघ का एक क़दम यह हो सकता है कि वह मानवता के विरुद्ध अपराध, युद्ध अपराध और शांति के विरुद्ध अपराध करने के कारण सऊदी अरब की फ़ाइल अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) में भेज दे लेकिन यह अंतर्राष्ट्रीय संस्था इस संबंध में अब भी टाल-मटोल से ही काम ले रही है। कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि सऊदी अरब द्वारा यमन में प्रतिबंधित हथियारों का प्रयोग, इस अपराध को रोकने में संयुक्त राष्ट्र संघ की अक्षमता का सूचक है और इसमें पश्चिमी देशों का पूरा पूरा हाथ है। (HN)