“अमरीका और इस्राईल एक ही सिक्के के दो रुख़ हैं ”
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यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह के प्रमुख ने कहा है कि इस्लामी और अरब देशों को एकजुट हो जाना चाहिए, इसलिए कि वे सब अमरीका और इस्राईल के निशाने पर हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २३, २०१७ १९:४६ Asia/Kolkata
  • “अमरीका और इस्राईल एक ही सिक्के के दो रुख़ हैं ”

यमन के जनांदोलन अंसारुल्लाह के प्रमुख ने कहा है कि इस्लामी और अरब देशों को एकजुट हो जाना चाहिए, इसलिए कि वे सब अमरीका और इस्राईल के निशाने पर हैं।

अंसारुल्लाह के महासचिव अब्दुल मलिक बदरुद्दीन अलहौसी ने रविवार को अंसारुल्लाह के संस्थापक हुसैन अलहौसी की बरसी पर आयोजित एक शोकसभा को संबोधित करते हुए कहा, अमरीका अपने हितों के लिए यमन की घेराबंदी करके रखना चाहता है।

अंसारुल्लाह के महासचिव ने उल्लेख किया कि सऊदी अरब में आले सऊद का शासन वास्तव में एक अमरीकी-ज़ायोनी शासन है, जो इस्राईल और अमरीका की सेवा कर रहा है।

अब्दुल मलिक अलहौसी का कहना था कि अमरीका और इस्राईल एक ही सिक्के के दो रुख़ हैं और ज़ायोनी शासन की बुनियाद ही पश्चिमी साम्राज्यवाद के हितों की रक्षा के लिए की गई है।

अंसारुल्लाह के प्रमुख ने कहा कि आले सऊद शासन, इस्लामी शासन होने का दावा करता है, जबकि इसका इस्लाम से दूर दूर तक का संबंध नहीं है।

अलहौसी ने यमन के बारे में ईरान की नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा, ईरान स्वाधीन और स्वतंत्र रहने के लिए विश्व साम्राज्यवाद के सामने डट गया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम ईरान द्वारा यमन की सहायता को एक अपराध मानता है, लेकिन यमन की निर्दोष जनता पर सऊदी बमबारी का समर्थन करता है। msm