तुर्की और क़तर बनाएंगे दोहा में सैन्य छावनी
तुर्की के राष्ट्रपति की क़तर यात्रा पर घोषणा की गई है कि तुर्की और क़तर में इस बात पर सहमति बनी है दोहा में एक संयुक्त सैन्य छावनी बनाई जाएगी जिसमें सैकड़ों तुर्क सैनिक रहेंगे।
तुर्की के राष्ट्रपति की क़तर यात्रा पर घोषणा की गई है कि तुर्की और क़तर में इस बात पर सहमति बनी है दोहा में एक संयुक्त सैन्य छावनी बनाई जाएगी जिसमें सैकड़ों तुर्क सैनिक रहेंगे। बताया जा रहा है कि यह सहमति तुर्की के अधिकारियों की फ़ार्स की खाड़ी के देशों की यात्राओं के बाद बनी है। तुर्की और क़तर का कहना है कि इस संयुक्त सैनिक छावनी का बनाया जाना दोनो देशों और क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है हालांकि बहुत से जानकारों का यह कहना है कि इसके क्षेत्रीय देशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे।
कुछ राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि तुर्की और फ़ार्स की खाड़ी के देशों की सरकारें निष्पक्ष नहीं हैं और क्षेत्र के लिए उनके कुछ कार्यक्रम हैं। उदाहरण स्वरूप फ़ार्स की खाड़ी के देशों ने सीरिया में लोकतांत्रिक सरकार को गिराने और वहां पर अपनी दृष्टिगत सरकार बनाने के उद्देश्य से तुर्की में व्यापक स्तर पर पूंजीनिवेश कर रखा है। इसके अतिरिक्त वे तुर्की की आर्थिक सहायता भी करते रहते हैं। इसके साथ ही इराक़ में अपने हितों के दृष्टिगत उनमें आपस में सहयोग जारी है।
सीधी सी बात है कि यह बातें दूसरे क्षेत्रीय देशों के हितों से टकराव रखती हैं जिससे क्षेत्र में शांति की जगह अशांति उत्पन्न होगी। हालांकि अंकारा सरकार का कहना है कि आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष के लिए वह इराक़ और सीरिया में मौजूद है। कुछ रिपोर्टें यह बताती है कि इन सैनिकों ने कई स्थान पर जनसंहार किया है। इससे पहले कुछ अरब देशों के अधिकारियों ने तुर्की और नैटो के बीच सहयोग का रहस्योद्धाटन किया था।
उल्लेखनीय है कि तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने एक बहुत बड़े आर्थिक, कूटनीतिक और सैनिक शिष्टमण्डल के साथ क़तर पहुंचे थे जहां पर यह समझौता हुआ।