यमन, रमज़ान की बरकतें और सूनीं मस्जिदें
पूरी दुनिया में मुसलमान रोज़े रख रहे हैं किन्तु इस वर्ष सबसे कठिन रोज़े यमनवासियों के हैं और वह आर्थिक, राजनैतिक व सुरक्षा दृष्टि से पिछले वर्ष से अधिक जटिल और कठिन परिस्थिति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
समाचार पत्र अलक़ुद्सुल अरबी वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि वर्तमान समय में अधिकतर शहरों में उपासना और नमाज़ के लिए विशेष स्थान के रूप में मस्जिदें पवित्र रमज़ान में ख़ाली पड़ी हुई हैं या मस्जिदों में आने जाने वालों की संख्या में बहुत अधिक कमी हो गयी है।
कुछ मस्जिदें तो हमलों की वजह से पूरी तरह तबाह और बाज़ार सुनसान हो गये हैं और बहुत सी दुकानों में पवित्र रमज़ान की विशेष सामग्रियां मौजूद ही नहीं हैं और यदि वस्तुएं दुकान में मौजूद भी हैं तो लोगों में उनको ख़रीदने की क्षमता नहीं पायी जाती।
यमन के विभिन्न शहरों, गांवों और नगरों में इस वर्ष रमज़ान का महीना, पिछले वर्ष से अधिक कठिन है। यमनवासी अपने दस्तरख़ान को विभिन्न प्रकार के खानों, आहार और व्यंजनों से सुसज्जित नहीं कर बल्कि वह इस प्रयास में रहते हैं कि इफ़्तार और सहरी में दो निवाला मिल जाए ताकि वह ज़िंदा रह सकें।
यमन में युद्ध ने इस देश की अर्थव्यवस्था का बुरा हाल कर दिया है, लोगों के पास खाने को खाना,पहनने को कपड़े और रहने को घर नहीं है, आय का कोई साधन नहीं है, हर परिवार केवल दो निवाला खाकर ज़िंदा रहने का प्रयास कर रहा है।
यमन में इस वर्ष का रमज़ान, त्रासदी लेकर आया है, भूख, निर्धनता और असुरक्षा ने हर ओर से घेर रखा है, हर नागरिक इसी भय रहता है कि आसमान से बरसने वाली मौत पर उसका नाम तो नहीं लिखा है।
ज्ञात रहे 2 साल से ज़्यादा समय से यमन पर सऊदी अरब का अतिक्रमण जारी है। सऊदी अरब के हमलों में यमन के ज़्यादातर स्वास्थ्य केन्द्र तबाह हो चुके हैं। सऊदी अरब ने यमन के त्याग पत्र दे चुके राष्ट्रपति मंसूर हादी को सत्ता में पहुंचाने के लिए इस देश पर व्यापक हमला आरंभ किया है। (AK)