यमन त्रासदी और दुनिया मूकदर्शक
संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवता प्रेमी मामलों के अधिकारी ने सचेत किया है कि यमन पूर्ण रूप से विघटन की कगार पर है और इस देश की जनता को युद्ध, भुखमरी और हैज़ा जैसी विभिन्न प्रकार की बीमारियों का सामन है और इन परिस्थितियों में दुनिया केवल मूकदर्शक बनी हई है।
मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवता प्रेमी मामलों के अधिकारी स्टीफ़न ओब्राएन ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि दुनिया में खाद्य पदार्थों की आपात स्थिति को समाप्त करने और यमन को जीवन की डगर पर लौटाने का समय आ गया है।
यमन, मानवीय दृष्टि से दुनिया के सबसे बुरे संकट का सामना कर रहा है और सऊदी अरब द्वारा इस देश पर निरंतर हमलों और अमरीका द्वारा रियाज़ के सैन्य समर्थन के कारण यह देश विनाश की कगार के निकट है। यमन पर सऊदी गठबंधन के हमलों पर मानवाधिकार का दावा करने वालों के समर्थन से यह देश मानवता के विरुद्ध अपराध, युद्ध अपराध और खाद्य संकट के नमूने में बदल चुका है।
यमन पर सऊदी अरब के हमलों के कारण इस देश के चिकित्सा केन्द्र, अस्पतालों और स्कूलों सहित आधार भूत ढांचे बुरी तरह तबाह हो चुके हैं और सऊदी अरब द्वारा इस देश के परिवेष्टन के कारण इस देश को भयंकर मानवीय त्रासदी का सामना है।
यमन में व्यापक स्तर पर हैज़े की बीमारी के फैलने से सिद्ध हो जाता है कि इस देश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी है। रिपोर्टों में बताया गया है कि अब तक हैज़े से 500 से अधिक यमनी अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं जबकि 55 206 यमनी नागरिक हैज़े में ग्रस्त हैं जिनमें से एक तिहाई संख्या बच्चों की है। अशंका यह व्यक्त की जा रही है कि अगले छह महीने में 1 लाख 50 हज़ार लोग हैज़े में ग्रस्त हो जाएंगे।
बहरहाल यमन विषम मानवीय स्थिति से गुज़र रहा है और मानवाधिकारों का दावा करने वाले देश या तो चुप बैठे तमाशा देख रहे हैं या सऊदी गठबंधन की सैन्य सहायता कर रहे हैं। (AK)