तुर्क जनता ने फ़्रीडम फ़्लोटिला पर घातक हमले की याद मनायी
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30 मई 2014 को इस्तांबोल में फ़्रीडम फ़्लोटिला पर हमले की चौथी बरसी पर आयोजित फ़िलिस्तीनी समर्थक तुर्क नागरिक
तुर्क जनता ने, इस्राईल की नाकाबंदी से घिरे ग़ज़्ज़ा पट्टी के लिए 2010 में मानवीय सहायता ले जाने वाले समुद्री राहत कारवां के बेड़े पर इस्राईल के घातक हमले की बरसी पर बुधवार को इस्तांबूल में मार्च किया।
बुधवार को हुए इस प्रदर्शन में तुर्क जनता ने ग़ज़्ज़ा की जनता से एकता दर्शाने वाले नारे लगाए जो पिछले एक दशक से इस्रईल की नाकाबंदी में जीवन बिता रही है। प्रदर्शन में उन लोगों के परिजन भी शामिल थे जो तुर्क जहाज़ मवी मरवरा पर सवार थे। इन लोगों ने फ़्रीडम फ़्लोटिला पर हमले के ज़िम्मेदार इस्राईली राजनेताओं व सैन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुक़द्दमे की मांग की।
ग़ौरतलब है कि 31 मई 2010 को इस्राईली नौसैनिक कमान्डोज़ ने स्पीडबोट और हेलीकॉप्टरों से 6 नागरिक जहाज़ों के बेड़े फ़्रीडम फ़्लोटिला पर भूमध्यसागर में अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में हमला किया था। इस हमले में 9 तुर्क नागरिक हताहत और लगभग 50 अन्य कार्यकर्ता घायल हुए थे। बाद में दसवां तुर्क नागरिक घाव सहन न कर पाने से इस दुनिया से चल बसा था।
फ़्रीडम फ़्लोटिला पर इस्राईली सैन्य हमले की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भर्त्सना हुयी थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस घटना की तुरंत जांच की मांग की थी और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने इस हमले को घृणित कहा था। बड़ी संख्या में मानवाधिकार गुटों ने इस हमले की भर्त्सना की थी, जबकि इस घटना के पीड़ितों के उद्देश्य के समर्थन में तुर्की, इंडोनेशिया, लेबनान और स्वीडन में दर्जनों प्रदर्शन हुए थे।
सितंबर 2010 में तुर्की ने इस्राईल के साथ संबंध विच्छेद कर लिया था और इस घटना पर माफ़ी मांगने से इंकार के कारण तेल अविव के दूत को अंकारा से निकाल दिया था। 4 साल बाद तुर्की में एक फ़ौजी अदालत ने 4 इस्राईली अधिकारियों की जो उसकी नज़र में मुख्य अभियुक्त थे, गिरफ़्तारी का वारेंट जारी किया था और अभियुक्तों की गिरफ़्तारी का वारेंट इंटरपोल के हवाले किया था, लेकिन इस क़दम का कोई नतीजा नहीं निकला। (MAQ/N)