यमन में सऊदी अरब के षड्यंत्रों में राष्ट्र संघ की भागीदारी
यमन के अंसारुल्लाह जनांदोलन ने हुदैदा बंदरगाह का नियंत्रण किसी तीसरे पक्ष के हाथ में देने के संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष प्रतिनिधि के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की है।
अंसारुल्लाह और उसके घटकों ने इस्माईल वलद शैख़ के इस प्रस्ताव को अत्यंत ग़ैर ज़िम्मेदाराना और यमन के दसियों लाख लोगों का अनादर बताया है। उन्होंने कहा है कि हुदैदा बंदरगाह पर नियंत्रण में सऊदी अरब के पिट्ठुओं की विफलता के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने यह प्रस्ताव दिया है। वलद शैख़ ने प्रस्ताव दिया था कि इस बंदरगाह का संचालन किसी तीसरे पक्ष के हाथ में दे दिया जाए या फिर इसे संयुक्त राष्ट्र संघ की निगरानी में संचालित किया जाए। यह प्रस्ताव, जो हालिया महीनों में हुदैदा बंदरगाह को अपने नियंत्रण में लेने की सऊदी अरब की कोशिशों से समन्वित है, एक प्रकार से यमन के लोगों की घेराबंदी कड़ी करने की सऊदी अरब की कार्यवाहियों और यमन में उसके वर्चस्ववादी लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की कोशिशों को वैधता प्रदान करने जैसा है।
सऊदी अरब, अमरीका की योजना के अनुसार यमन को कमज़ोर करने के लिए उसे कई भागों में बांटने और वहां फेड्रल सरकार स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। इन परिस्थितियों में यमन के भगोड़े पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी, सऊदी अरब के एजेंट के रूप में राष्ट्र संघ और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की सहायता से यमन के अधिक दमन और इस देश की जनता पर दबाव बढ़ाने और साथ ही विभिन्न क्षेत्रों को यमन की सरकार के नियंत्रण से बाहर निकालने का मार्ग प्रशस्त करना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ भी सऊदी अरब के अपराधों पर आंखें मूंद कर पश्चिमी यमन में उसकी पृथकतावादी कार्यवाहियों को औचित्य प्रदान करने की कोशिश में है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र संघ जिस चीज़ की अनदेखी कर रहा है वह इस देश की युद्धग्रस्त जनता की दयनीय स्थिति है जिसे युद्ध के कारण विभिन्न प्रकार के दुखों, समस्याओं, अकाल और हैज़े समेत अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। (HN)