पक्षपात के इल्ज़ाम में यमन से यूएन के मध्यस्थ हुए बाहर
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यमन की उच्च प्रशासनिक परिषद ने देश के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा नियुक्त विशेष दूत इस्माईल उल्द शैख़ अहमद को पक्षपाती बताते हुए कहा है कि यह परिषद उनसे कोई संपर्क नहीं रखेगी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun ०६, २०१७ १३:३६ Asia/Kolkata
  • यमन की सर्वोच्च राजनैतिक परिषद के प्रमुख सालेह अली सम्माद (एएफ़पी के सौजन्य से)
    यमन की सर्वोच्च राजनैतिक परिषद के प्रमुख सालेह अली सम्माद (एएफ़पी के सौजन्य से)

यमन की उच्च प्रशासनिक परिषद ने देश के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा नियुक्त विशेष दूत इस्माईल उल्द शैख़ अहमद को पक्षपाती बताते हुए कहा है कि यह परिषद उनसे कोई संपर्क नहीं रखेगी।

सोमवार रात टेलीविजन पर बोलते हुए इस परिषद के प्रमुख सालेह सम्माद ने कहा कि इस्माईल उल्द शैख़ अहमद को उन इलाक़ों में दाख़िल नहीं होने देंगे जिनका नियंत्रण हूसी अंसारुल्लाह आंदोलन के हाथ में है।

सम्माद ने कहा, “हम एक ज़बान होकर कह रहे हैं कि इस मध्यस्थ का यहां स्वागत नहीं है। इस्माईल उल्द शैख़ अहमद से अब कोई संपर्क नहीं होगा, उनका यहां स्वागत नहीं है।”

उन्होंने कहा कि यमन संकट को हल करने के लिए अहमद उपयोगी नहीं। सम्माद ने कहा कि अगर यूएन किसी दूसरे को एलची नियुक्त करता है तो उसे जनता की इच्छा का सम्मान करना होगा।

सालेह सम्माद ने बताया कि यह फ़ैसला हूसी आंदोलन और उसके घटक जनरल पीपल्ज़ कॉन्ग्रेस पार्टी ने मिल कर लिया है।

उधर हूसी आंदोलन के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुस सलाम ने सम्माद के दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के एलची ने यमन संकट के संबंध में निष्पक्षता को नज़रअंदाज़ किया तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों का सम्मान नहीं किया।

ग़ौरतलब है कि यमन पर 26 मार्च 2015 से सऊदी अरब का अतिक्रमण जारी है जिसमें अब तक 12000 से ज़्यादा नागरिक हताहत, दसियों हज़ार घायल और लाखों विस्थापित हुए हैं।  (MAQ/N)