यमन के ख़िलाफ़ अपराध में सऊदी अरब और यूएई में होड़
यमन के ख़िलाफ़ अपराध में सऊदी अरब और यूएई में होड़
दक्षिणी यमन में संयुक्त अरब इमारात या यूएई की गुप्त जेलों की मौजूदगी की रिपोर्टें सामने आने के बाद कि जिसे क़तर के टीवी चैनल अलजज़ीरा ने क़तर और सऊदी अरब व उसके घटकों के बीच हालिया तनाव के बाद प्रकाशित किया, एमनेस्टी इंटरनैश्नल ने इन गुप्त जेलों के बारे में तुरंत जांच की मांग की।
एमनेस्टी इंटरनैश्नल के जांच विभाग के अधिकारी लेन मातूफ़ ने कहा कि यातना नेटवर्क बनाने और गुप्त जेलों में हज़ारों यमनियों को बंद करने में यूएई और दूसरे पक्षों के रोल के बारे में यूएन की सीधी जांच के नतीजे का जल्द ही एलान किया जाएगा। इससे पहले ह्यूमन राइट्स वॉच ने यूएई के युवराज मोहम्मद बिन ज़ाएद को ख़त लिखकर उनसे यमन में यूएई की गुप्त जेलों की मौजूदगी के बारे में सुबूत व जानकारियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा।
सऊदी अरब के 10 सदस्यीय घटक में यमन के ख़िलाफ़ जंग में यूएई सऊदी अरब के साथ सबसे ज़्यादा सहयोग कर रहा है। यमन के ख़िलाफ़ जंग में यूएई के बड़ी संख्या में सैनिक व लड़ाकू विमान शामिल हैं। यूएई ने यमन के दक्षिणी क्षेत्रों पर सबसे ज़्यादा ध्यान केन्द्रित कर रखा है।
यूएई के सैनिक दक्षिणी यमन में नागरिकों को अंधाधुंध पकड़ते और उन्हें बुरी तरह यातना देकर मार रहे हैं।
ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनैश्नल सहित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने अदन, मुकल्ला, लहेज और अबयन में यूएई की कम से कम 18 गुप्त जेलों की रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। इस संदर्भ में अहम बिन्दु यह है कि अमरीका ने गुप्त जेल बनाने और यमनियों को क़ैदी बनाकर उनसे पूछताछ की प्रक्रिया में यूएई से सहयोग का खंडन किया है, लेकिन अमरीकी न्यूज़ एजेंसी असोशिएटेड प्रेस की इनवेस्टिगेटिव टीम ने इस मिलिभगत का पर्दाफ़ाश किया है।
ऐसा लगता है कि दक्षिणी यमन में यूएई की गतिविधियों का लक्ष्य यमन के ख़िलाफ़ जंग में भाग लेने के बदले में अपना हिस्सा लेना है। इसी आधार पर यूएई पहले ही यमन के सुक़ुतरा द्वीप के बड़े भाग पर क़ब्ज़ा कर चुका है। दूसरी ओर सऊदी अरब भी यमन की स्ट्रैटिजिक दृष्टि से अहम बंदरगाह हुदैदा को यूएन की योजना के सांचे में अपने क़ब्ज़े में करने की कोशिश में है।
वास्तव में यमन के ख़िलाफ़ जंग में सऊदी अरब को यूएई का साथ, यमन के क्षेत्रों में अपनी अपनी पैठ बनाने के लिए दोनों देशों के बीच एक तरह की प्रतिस्पर्धा के जन्म लेने का कारण बना है। अमरीकी सरकार भी यमन में यूएई और सऊदी अरब के बीच प्रतिस्पर्धा को अपने हित में देख रही है। (MAQ/T)