सीरिया और ट्यूनीशिया के बीच संबंधों में बहाली का नया चरण
ट्यूनीशिया के कुछ सांसदों ने संसद में एक विध्येक पेश करके सीरिया के साथ फिर से संबंध शुरु करने की मांग की है।
ट्यूनीशिया के सांसदों ने जो विधेयक पेश किया है उसे दोनों देशों का संयुक्त हित बताया है। मध्यपूर्व और उत्तरी अफ़्रीक़ में परिवर्तन की चिंगारी 17 दिसंबर 2010 में ट्यूनीशिया में लगी थी और धीरे धीरे उसकी चपेट में दूसरे देश भी आ गये। यही कारण है कि ट्यूनीशिया स्वयं को अरब जगत में लोकतंत्र की मांग पेश करने वालों में अग्रिम मानता है। इसी दृष्टिकोण के कारण 2012 के आरंभिक महीनों में ट्यूनीशिया ने सीरिया से अपना राजदूत वापस बुला लिया था।
सीरिया की स्थिति के बदलने और बश्शार असद के सत्ता में यथावत बाक़ी रहने के बावजूद अब प्रश्न यह उठता कि किस लिए ट्यूनीशिया के सांसद सीरिया के साथ फिर से संबंधों की बहाली की मांग कर रहे हैं? वास्तविकता यह है कि सीरिया के बारे में ट्यूनीशिया के दृष्टिकोण बदले जाने का मुख्य कारण यह है कि ट्यूनीशिया के सांसद आतंकवाद को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा ख़तरा मानते हैं। इस लेहाज़ से आतंकवाद, ट्यूनीशिया के लिए एक गंभीर ख़तरा समझा जाता है क्योंकि सीरिया संकट के आरंभ होते ही हज़ारों ट्यूनीशियाई शहरी सीरिया सरकार के विरुद्ध युद्ध करने के लिए आतंकवादी गुटों में शामिल हो गये और अब भी लगभग तीन हज़ार ट्यूनीशियाई आतंकवादी गुटों में शामिल हैं।
सीरिया की सेना और उसके घटक बलों की रणक्षेत्र में ज़बरदस्त सफलता के कारण, इन तीन हज़ार लोगों की ट्यूनीशिया वापसी, देश की सरकार और जनता के लिए एक सुरक्षा चुनौती बन गयी है। ट्यूनीशिया में सक्रिय कुछ दल और लोग, सीरिया में सक्रिय आतंकवादियों में शामिल ट्यूनीशिया के नागरिकों के स्वदेश लौटने के विरोधी हैं जबकि ट्यूनीशिया की सरकार को यह विश्वास है कि चूंकि यह लोग ट्यूनीशियाई नागरिक हैं इसीलिए इनको देश में आने से रोका नहीं जा सकता।
प्रसिद्ध टीकाकार कारलोटा गाल 25 फ़रवरी 2017 को न्यूयार्क टाइम्ज़ में प्रकाशित अपने लेख में लिखती हैं कि ट्यूनीशिया की जनता हज़ारों युवा लड़ाकों की वापसी से भयभीत है। वह इन लोगों की स्वदेश वापसी का विरोध करते हुए लिखती हैं कि जो लोग इस समय सीरिया में मौजूद हैं उन्होंने बहुत अधिक युद्ध का अनुभव प्राप्त कर लिया है और हथियारों के साथ ही उठते, बैठते, सोते और जागते हैं। यह लोग आतंकवाद की संस्कृति में ढल चुके हैं और इन लोगों की ट्यूनीशिया वापसी, देश के कुछ दलों और लोगों को स्वीकार नहीं है। (ak)