क़तर विवाद गहराया, पीजीसीसी के बिखरने का ख़तरा
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10 जुलाई ईयू विदेश नीति प्रभारी फ़ेड्रिका मोगरीनी (दाएं) जॉर्डन के विदेश मंत्री ऐमन सफ़ादी के साथ ब्रसल्ज़ में संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में
योरोपीय संघ ने फ़ार्स खाड़ी के देशों के संगठन पीजीसीसी के बिखरने की आशंका जतायी और इसका कारण इस संगठन के सदस्य देशों के बीच मौजूदा विवाद को बताया है।
फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद पीजीसीसी के सदस्य देशों में सऊदी अरब, बहरैन और यूएई ने क़तर पर आतंकवाद व क्षेत्र को अस्थिर करने का आरोप लगाते हुए उससे कूटनैतिक संबंध और ज़मीनी, हवाई व समुद्री संपर्क ख़त्म कर लिए हैं।
इस संगठन के दूसरे सदस्य कुवैत और ओमान इस विवाद में निष्पक्ष रहे हैं। कुवैत सिटी क़तर और चार अरब देशों के बीच हुए विवाद को हल करने के लिए मध्यस्थ का रोल अदा कर रहा है। क़तर ने अपने ऊपर चार अरब देशों सऊदी अरब, यूएई, बहरैन और मिस्र की ओर से लगाए गए इल्ज़ाम को ख़ारिज करते हुए कहा है कि वह बहिष्कार करने वाले देशों की शर्त को क़ुबूल नहीं करेगा।
सोमवार को योरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेड्रिका मोगरीनी ने कहा कि इस संघ को इस बात की चिंता है कि कहीं पीजीसीसी इस विवाद के कारण बिखर न जाए।
इससे पहले क़तर के उपप्रधान मंत्री ने भी कहा था कि पीजीसीसी अंतिम सांसे ले रहा है। अब्दुल्लाह बिन हमद आले अतीया ने कहा कि क़तर को यह बात समझ में आ गयी है कि उन देशों पर भरोसा नहीं किया जा सकता जिन देशों ने उसकी नाकाबंदी कर रखी है। मोगरीनी ने कहा कि योरोपीय संघ कुवैत की ओर से जारी कोशिश का समर्थन करता है।
मोगरीनी ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं कि हम कुवैत के शासक शैख़ सबाह अलअहमद अस्सबाह की मध्यस्थता की कोशिश का समर्थन करते हैं और हमें उम्मीद है कि कुवैत की मध्यस्थता से यह तनाव दूर हो सकता है।” (MAQ/N)