तुर्की, हमले के डर से इस्राईली दूतावास बंद
ज़ायोनी शासन ने हमले और मुसलमानों के विरोध प्रदर्शन के भय से अंकारा और इस्तांबोल में अपने दूतावास और वाणिज्य दूतावासों को सोमवार को बंद रखा।
इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार ज़ायोनी शासन के विदेशमंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि सुरक्षा कारणों से दूतावास और वाणिज्य दूतावासों को बंद करने का फ़ैसला किया गया है।
कुछ ही दिन पहले प्रदर्शनकारियों ने ज़ायोनी शासन की हिंसक कार्यवाहियों और विध्वंसक नीतियों के विरोध में इस्तांबोल में इस्राईल के वाणिज्य दूतावास और अंकारा में इस्राईली राजदूत के घर के बाहर धरना दिया था और विरोध प्रदर्शन किया था।
प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान अतिग्रहित क्षेत्रों विशेषकर मस्जिदुल अक़सा के बारे में ज़ायोनी शासन की नीतियों की निंदा की और इस्राईल के विरुद्ध जमकर नारे बाज़ी की थी।
लगभग एक महीना पहले भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने अंकारा में इस्राईल के दूतावास के बाहर प्रदर्शन किए थे। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में एेसे प्लेकार्ड और बैनर उठाए हुए थे जिन पर इस्राईल के विरुद्ध और फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के समर्थन में नारे लिखे हुए थे।
90 के दशक में रजब तैयब अर्दोग़ान के प्रधानमंत्री बनने से पहले तक तुर्की और इस्राईल के बीच व्यापक स्तर पर सामरिक सहयोग रहा किन्तु वर्ष 2010 में ग़ज़्ज़ा के लिए सहायता सामग्री ले जा रहे कारवां पर इस्राईली कमान्डोज़ के हमले के बाद तेल अवीव और अंकारा के संबंधों में तनाव पैदा हो गया था।
इसके बाद इस्राईल और तुर्की ने जून 2016 में एक समझौते पर हस्ताक्षर करके भारी क्षेत्रीय विरोध के बीच कूटनयिक संबंध दोबारा स्थापित करने पर सहमति जताई थी। (AK)