सीरिया में तुर्की का हस्तक्षेप, देश में बढ़ने लगा विरोध
पड़ोसी देशों के आंतरिक मामलों में तुर्की ही हस्तक्षेपपूर्ण नीतियों के विरोधियों की निंदाएं यथावत जारी हैं।
इस संबंध में तुर्की के रिपब्लिकन पिपल्ज़ पार्टी के नेता कमाल क़िलीचदार का कहना है कि अंकारा सरकार, सीरिया में जारी तनाव और संकट के बढ़ने की ज़िम्मेदार है। तुर्की के इस वरिष्ठ राजनेता ने कहा कि सरकार, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय और तार्किक नीति अपनाने के बजाए, दुश्मनी और दबाव डालने की नीति अपनाए हुए है और यही नीति अपनाने के कारण तुर्की और सीरिया सहित दुनिया के अन्य देशों के साथ अंकारा के संबंध तनावग्रस्त हो गये हैं।
तुर्की की संसद में तुर्की के सबसे बड़े विपक्षी दल रिपब्लिकन पिपल्ज़ पार्टी के नेता का यह बयान एेसी स्थिति में सामने आया है कि इससे पहले सीरिया सरकार की वार्ताकार टीम के प्रमुख बश्शार जाफ़री ने अंकारा सरकार की हस्तक्षेप पूर्ण नीतियों की आलोचना करते हुए कहा था कि तुर्क सरकार ने तीन लाख आतंकवादियों को तुर्की से सीरिया में घुसपैठ कराने और उनके सामरिक समर्थन की भूमिका अदा की है किन्तु सीरिया संकट में तुर्की की अंधी नीति के परिणाम में न केवल यह कि देश के क़ानूनी राष्ट्रपति बश्शार असद का तख़्ता उलटा बल्कि तुर्की की सुरक्षा व्यवस्था जर्जर हो गयी और तुर्की के भीतर आतंकवादियों के हमले दिन प्रतिदिन तेज़ हो गये।
इस संबंध में कमाल क़िलीचदार कहते हैं कि तुर्क सरकार बश्शार असद की क़ानूनी सरकार गिराने की इच्छुक है किन्तु अभी तक यह मामला व्यवहारिक नहीं हो सका और अर्दोग़ान ने इस प्रकार के वादे करके केवल क्षेत्र और दुनिया में अपनी सरकार की छवि ही ख़राब की है।
तुर्क सरकार की इस ग़लत विदेश नीति के कारण क्षेत्र और दुनिया के राजनैतिक हल्क़ों के ध्यान तुर्क सरकार की ओर मुड़ गये। उदाहरण स्वरूप तुर्क सरकार ने फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती अरब देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करके इन देशों में अपनी पोज़ीशन मज़बूत करने का प्रयास किया किन्तु पहली नकारात्मक प्रतिक्रिया स्वरूप सऊदी अधिकारियों ने क़तर से तुर्क सैनिकों के निष्कासन की मांग कर दी। (AK)