क्या नेतनयाहू के राजनैतिक भविष्य का अंत आ गया है?
हालिया हफ़्तों में अतिग्रहित फ़िलिस्तीन में ज़ायोनी प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में तेज़ी आयी है। इस्राईली अनेक वित्तीय भ्रष्टाचार के इल्ज़ाम में नेतनयाहू के ख़िलाफ़ तुरंत मुक़द्दमा चलाने की मांग और उनके ख़िलाफ़ इल्ज़ाम की जांच की प्रक्रिया के लंबा खिंचने की आलोचना कर रहे हैं।
2 जनवरी 2017 को नेतनयाहू के ख़िलाफ़ करोड़ों डॉलर की रिश्वत लेने सहित भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में पूछताछ शुरु हुयी।
नेतनयाहू के ख़िलाफ़ आर्थिक भ्रष्टाचार के दस्तावेज़ सामने आने के बावजूद भी अभी तक उनके ख़िलाफ़ अदालत या ज़ायोनी सांसदों की ओर से गंभीर कार्यवाही नहीं हुयी है। ऐसे हालात में ये प्रदर्शन नेतनयाहू के ख़िलाफ़ कार्यवाही न होने और उन्हें सत्ता से न हटाने को लेकर हो रहे हैं।
नेतनयाहू के कर्मपत्र में सफलता से ज़्यादा नाकामी दिखाई देती है। बेरोज़गारी, मुद्रास्फ़ीति, ग़रीबी, भ्रष्टाचार, ख़ुदकुशी और जीवन गुज़ारने के लिए अनैतिक कृत्यों में वृद्धि उनके कर्मपत्र में नाकामी के रेकार्ड हैं।
दूसरी ओर फ़िलिस्तीनी जनता के दमन में नेतनयाहू की कथित सुरक्षा नीति की नाकामी के कारण, फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के ख़िलाफ़ इस्राईल की बौखलाहट पहले से ज़्यादा बढ़ गयी है और यही चीज़ ज़ायोनी अधिकारियों के बीच बढ़ते मतभेद का भी कारण है।
एक अहम बिन्दु यह है कि ज़ायोनी शासन के भ्रष्टाचार के मामले और उनकी दिखावटी जांच आम तौर पर उस समय होती है जब ज़ायोनी शासन में राजनैतिक मदभेद और सत्ता की जंग तेज़ हो जाती है।
इस्राईल के हालात से नेतनयाहू की स्थिति और ख़राब हो गयी है जिन्होंने मार्च 2015 में संसद के मध्यावधि चुनाव के आयोजन के ज़रिए अपनी लड़खड़ाती राजनैतिक स्थिति को बेहतर करने की कोशिश की थी।
नेतनयाहू के क्रियाकलापों व नीतियों के ख़िलाफ़ इस्राईलियों के बढ़ते प्रदर्शन के मद्देनज़र, ज़ायोनी शासन के राजनैतिक हल्क़े इन हालात की नेतनयाहू के राजनैतिक करियर के अंत के रूप में समीक्षा कर रहे हैं। (MAQ/T)