उद्देश्यों की प्राप्ति तक प्रतिरोध जारी रहेगाः हमास
जायोनी शासन ने वर्ष 2015 में मुसलमानों के पवित्र स्थल मस्जिदुल अक्सा के विरुद्ध जो उत्तेजक कार्यवाही की थी वह फिलिस्तीनियों के तीसरे इंतेफ़ाज़ा "क़ुद्स" के आरंभ होने का कारण बनी।
फ़िलिस्तीन के हमास आंदोलन ने 28 सितंबर को एक विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि प्रतिरोध, अतिग्रहणकारियों से मुकाबले के लिए फिलिस्तीनी जनता का वैध व स्ट्रैटेजिक विकल्प है।
हमास ने यह विज्ञप्ति फिलिस्तीनियों के दूसरे इंतेफाज़ा" मस्जिदुल अक्सा" की 17वीं वर्षगांठ पर जारी की और इस विज्ञप्ति में उसने बल देकर कहा है कि उद्देश्यों की प्राप्ति तक प्रतिरोध जारी रहेगा।
17 साल पहले वर्ष 2000 में जायोनी शासन की दक्षिण पंथी लिकोड पार्टी के तत्कालीन प्रमुख एरियल शेरून कुछ दूसरे जायोनी अधिकारियों और सैनिकों के साथ मस्जिदुल अक्सा का अपमान करते हुए उसके प्रांगण में प्रविष्ट हो गये थे जिससे फिलिस्तीनी जनता का क्रोध फूट पड़ा था और उसके बाद फिलिस्तीनियों का जो प्रतिरोध आंरभ हुआ उसे मस्जिदुल अक्सा इंतेफाज़ा का नाम दिया गया।
जायोनी शासन ने वर्ष 2015 में मुसलमानों के पवित्र स्थल मस्जिदुल अक्सा के विरुद्ध जो उत्तेजक कार्यवाही की थी वह फिलिस्तीनियों के तीसरे इंतेफ़ाज़ा "क़ुद्स" के आरंभ होने का कारण बनी।
फिलिस्तीनी जनता का इंतेफाज़ा इस बात का सूचक है कि वह अतिग्रहणकारी जायोनी शासन से मुकाबला करने का जहां दृढ़ संकल्प रखती है वहीं इस शासन के साथ हर प्रकार की तथाकथित शांति वार्ता की विरोधी भी है।
जायोनी शासन के साथ तथाकथित शांति वार्ता के जारी रहने के नकारात्मक परिणामों के स्पष्ट हो जाने के बाद फिलिस्तीनी जनता ने प्रतिरोध का जो मार्ग चुना है उसका सही होना हर समय से अधिक स्पष्ट हो गया है।
साथ ही जायोनी शासन के साथ तथाकथित शांति वार्ता प्रक्रिया का जारी रहना इस शासन के अधिक दुस्साहसी होने और विस्तारवादी कार्यवाहियों के जारी रहने का कारण बना है। बहरहाल फिलिस्तीनी जनता विशेषकर युवाओं ने जायोनी विरोधी कार्यवाहियों में गति प्रदान कर दी है और उनकी यह कार्यवाही इस बड़ी वास्तविकता की सूचक है कि फिलिस्तीनी राष्ट्र ने सही मार्ग का चयन किया है। MM