सऊदी शाह सलमान की मॉस्को यात्रा का उद्देश्य क्या है?
सऊदी अरब ने शाह सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ की आगामी मॉस्को यात्रा को "ऐतिहासिक" बताया है।
कूटनीति की भाषा में जो कहा जाता है, उसका मतलब बहुत कम वह होता है जो समझा जाता है, बल्कि यहां शब्दों से खेला जाता है।
लेकिन इस बार जो कहा गया है वह सही भी हो सकता है।
रियाज़ और मॉस्को के संबंधों में पिछले कई दशकों से तनाव पाया जाता है। यह दोनों तेल की महाशक्तियां दुनिया के कुल तेल का क़रीब 50 प्रतिशत उप्तापदन करती हैं और तेल मार्केट में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए एक दूसरे से कड़ी प्रतिस्पर्धा करती हैं।
आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सीरिया के राष्ट्रपति बशार असद के समर्थन के कारण, रूस और सऊदी अरब के बीच की खाई और चौड़ी हो गई।
हालांकि अब सऊदी अरब ने बशार असद को तुरंत रूप से सत्ता से हटाने की अपनी मांग से क़दम पीछे खींच लिए हैं और सीरिया में रूस के सैन्य अभियान की निंदा बंद कर दी है।
दमिश्क़ का दावा है कि रूस के हवाई हमलों की सहायता से सीरिया के 92 प्रतिशत इलाक़ों को आज़ाद कराया जा चुका है।
क्रेमलिन के एक सलाहकार ने दावा किया है कि शाह सलमान की मॉस्को यात्रा सीरिया युद्ध में सऊदी गुट की हार से संबंधित है।
मॉस्को स्थित राजनीतिक शोध की संस्था के प्रमुख सरगेई मारकोव का कहना है कि सीरिया में सऊदी अरब की हार हो चुकी है, इसमें कोई संदेह नहीं है, और अब सीरिया में अल नुस्रा फ़्रंट समेत सऊदी समर्थन प्राप्त गुटों के वजूद को ख़तरा है।
उन्होंने कहा कि सऊदी शाह अपनी इस यात्रा में इस बात के लिए भरपूर प्रयास करेंगे कि सऊदी समर्थन प्राप्त समस्त गुटों को नष्ट न किया जाए। msm