सूची शिखर सम्मेलन और सीरिया विवाद का अंत
रूस के सूची शहर में ईरान, रूस और तुर्की के शिखर सम्मेलन का सीरिया संकट पर गहरा असर हो रहा है क्योंकि यह संकट अब सक्रिय राजनैतिक व कूटनैतिक गतिविधियों के दायरे में आ गया है।
यह शिखर सम्मेलन सीरिया में दाइश के समापन के वक़्त आयोजित हुआ जिसके बाद अब जेनेवा बैठक का आठवां चरण आयोजित होने जा रहा है जहां सीरिया को विभाजित करने की साज़िश की हमेशा के लिए समाप्ति की घोषणा अपने आज हो जाएगी।
22 नवम्बर को दक्षिणी रूस के सूची शहर में आयोजित होने वाली तीन पक्षीय शिखर बैठक जिसमें रूस, ईरान और तुर्की के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया सीरिया के नए भविष्य के निर्माण की दिशा में सक्रिय व सार्थक क़दम साबित होगी जिसमें सीरिया के किसी भी पक्ष को बाहर नहीं रखा जाएगा बल्कि सभी पक्षों को जगह मिलेगी।
रूस ने सूची शिखर बैठक में सीरियाई पक्षों की समग्र वार्ता का प्रस्ताव दिया जिसका ईरान और तुर्की ने भी स्वागत किया। रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन ने कहा कि यह बैठक सूची शहर में आयोजित होगी जिसमें सभी सीरियाई पक्ष भाग लेंगे और यह बैठक जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ की निगरानी में होने वाली बैठक की बुनियाद बनेगी।
सीरिया की घटनाओं की समीक्षा की जाए तो यह तथ्य समझ में आ जाता है कि सीरियाई सरकार देश के 95 प्रतिशत से अधिक भागों पर अपना नियंत्रण बहाल कर लेने के बाद अतीत की तुलना में बहुत ताक़तवर बन चुकी है। सीरिया ने अपनी सेना तथा घटकों की मदद से उस आतंकवाद का काम तमाम किया है जिसने पूरे इलाक़े को ख़तरे में डाल दिया था। हालिया दिनों सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद की रूस यात्रा और रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन से उनकी मुलाक़ात आतंकवाद से लड़ाई में सीरिया की विजय की घोषणा के समान थी जिसने सबको चौंका दिया था।
यहीं से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि विरोधियों से वार्ता के दौरान सीरियाई सरकार की स्थिति काफ़ी मज़बूत होगी। इससे पहले तक अमरीका और तुर्की जैसे अनेक देश सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार असद के त्यागपत्र पर ज़ोर दे रहे थे लेकिन उन्होंने भी अपनी यह रट छोड़ दी है।
परिस्थितियों का जायज़ा लिया जाए तो यह प्रतीत होता है कि अमरीका ने सीरिया के मामले में अपनी भूमिका बहुत सीमित कर ली है लेकिन फिर भी अमरीका पर भरोसा नहीं किया जा सकता जिसने सीरिया के भीतर 13 सैन्य ठिकाने सीरियाई सरकार की अनुमति के बग़ैर बना रखे हैं। सूची शिखर सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा कि सीरिया की धरती पर इस देश की अनुमति के बग़ैर किसी भी विदेशी सैनिक की उपस्थिति का कोई औचित्य नहीं है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि सीरिया की धरती पर अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति दमिश्क़ सरकार की इच्छा की अवमानना है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि सीरिया में अमरीकियों की गतिविधियां ग़ैर क़ानूनी क़ की गतिविधियों की इच्छा की अवमानना है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि सीरिया में अमरीकियों की गतिविधियोंब्ज़े के समान हैं।
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने भी अमरीका पर तेज़ हमला करते हुए कहा कि खेद की बात है कि अमरीका ने सीरिया में अपने वादे पूरे नहीं किए, अमरीकियों ने आतंकियों से लड़ने के बजाए उनसे सहयोग किया।
तुर्की की नीतियों में यह बदलाव और उसका रूस और ईरान के क़रीब आना इस बात का चिन्ह है कि निकट भविष्य में रूस, ईरान, सीरिया और तुर्की का एक गठजोड़ बन सकता है जो सीरिया संकट के समाधान और नए भविष्य के निर्माण में भूमिका अदा करेगा।
सीरिया आज काफ़ी बेहतर हालत में है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अगला चरण आसान होगा बल्कि वाशिंग्टन निश्चित रूप से कठिनाइयां खड़ी करने की कोशिश करेगा।
साभर अलवक़्त ईरान