ट्रम्प का एलान एक नए बालफ़ोर का जन्म है, हसन नसरुल्लाह
हिज़्बुल्लाह के महासचिव सय्यद हसन नसरुल्लाह ने कहा है कि बालफ़ोर घोषणापत्र के 100 साल बीतने के बावजूद अमरीकी सरकार की क़ुद्स के ख़िलाफ़ कार्यवाही ने एक नए बालफ़ोर को जन्म दिया है।
सय्यद हसन नसरुल्लाह ने गुरुवार की रात टेलीविजन पर भाषण में क़ुद्स को ज़ायोनी शासन की राजधानी के रूप में मान्यता देने के ट्रम्प के क़दम के बारे में कहा कि ट्रम्प ने अपने इस फ़ैसले से क़ुद्स को पूरी तरह ज़ायोनियों के क़ब्ज़े में दे दिया और अब ज़ायोनी क़ुद्स के यहूदीकरण और नई कालोनियों के निर्माण प्रक्रिया को बहुत तेज़ कर देंगे।
उन्होंने कहा कि ट्रम्प के इस फ़ैसले से मस्जिदुल अक़्सा के लिए गंभीर ख़तरा पैदा हो गया है और अमरीका का यह फ़ैसला करोड़ों मुसलमानों और ईसाइयों की भावनाओं का अपमान है क्योंकि इस शहर से उनकी संस्कृति व इतिहास जुड़ा हुआ है और उनके पवित्र स्थल इस शहर में मौजूद हैं।
हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने बैतुल मुक़द्दस को फ़िलिस्तीन के विषय का केन्द्र बिन्दु बताते हुए कहा कि कुछ लोगों का यह मानना है कि ट्रम्प ने अपने इस काम से फ़िलिस्तीनियों और ज़ायोनी शासन के बीच साठगांठ वार्ता को गहरा आघात पहुंचाया है और कुछ लोगों का यह मानना है कि यह बातचीत बहुत पहले नाकाम हो चुकी थी और ट्रम्प ने उसकी मौत का एलान किया है।
उन्होंने कहा कि इस्राईल अंतर्राष्ट्रीय क़ानून व सहमतियों का कोई सम्मान नहीं करता और जिसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय कहते हैं उसकी उसकी नज़र में कोई अहमियत नहीं है।
सय्यद हसन नसरुल्लाह ने इस्लामी और अरब देशों से मांग की कि वे अपने यहां अमरीकी राजदूतों को तलब करें और क़ुद्स के बारे में ट्रम्प के फ़ैसले पर अपनी आपत्ति दर्शाएं।
ग़ौरतलब है कि बुधवार की रात अमरीकी राष्ट्रपति के क़ुद्स को ज़ायोनी शासन की राजधानी घोषित करने के फ़ैसले की इस्लामी, अरब और योरोपीय जगत की ओर से निंदा हो रही है।