फ़िलिस्तीन के संबंध में योरोप-अमरीका की अलग अलग योजना...
एक पश्चिमी मीडिया ने अमरीकी राष्ट्रपति की पश्चिम एशिया में साठगांठ की योजना और इसकी नाकामी की अधिक संभावना के मद्देनज़र इस संबंध में योरोप की विशेष योजना को लागू करने की सूचना दी है।
अलमॉनिटर वेबसाइट ने एक रिपोर्ट में लिखा, योरोपीय संघ ट्रम्प की इस्राईल-फ़िलिस्तीनियों के बीच साठगांठ की योजना के नाकाम होने के मद्देनज़र अपनी विशेष योजना को लागू करना चाहता है जिसे फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने पेश किया है।
अलमॉनिटर ने ट्रम्प और मैक्रोन के बीच मतभेद की ओर इशारा करते हुए लिखा है कि मैक्रोन ने इस मतभेद के संबंध में ट्रम्प से मुलाक़ात की जिसका नतीजा यह सामने आया कि ट्रम्प पश्चिम एशिया साठगांठ योजना को आगे बढ़ाएंगे लेकिन मैक्रोन ने इसका विरोध किया।
फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रोन और ज़ायोनी प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू के बीच पेरिस में हुयी मुलाक़ात में फ़िलिस्तीन साठगांठ योजना को लेकर मतभेद सामने आए।
कुछ कूटनैतिक सूत्रों का कहना है कि नेतनयाहू ने मैक्रोन के साथ इस मुलाक़ात में अमरीका की साठगांठ योजना के बारे में चिंता जतायी।
उधर योरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेड्रिका मोग्रीनी ने भी शुक्रवार को साठगांठ वार्ता के क्षितिज के स्पष्ट न होने की बात को स्वीकार करते हुए कहा कि ब्रसल्ज़ इस संबंध में दूसरे फ़्रेमवर्क को अपनाने के लिए मजबूर है।
ब्रिटेन से प्रकाशित अख़बार द गार्डियन ने भी क़ुद्स के बारे में ट्रम्प के हालिया फ़ैसले को उनके दामाद जैरेड कुश्नर और सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान के बीच हुयी सहमति का नतीजा बताया है। इस अख़बार ने लिखा है, कुश्नर और युवराज मोहम्मद बिन सलमान फ़िलिस्तीनियों-इस्राईलियों के बीच शांति के लिए एक गुप्त सहमति पर काम कर रहे हैं जो सबसे ज़्यादा इस्राईली शासन के हित में है।
गार्डियन लिखता है, यह वास्तव में सहमति नहीं बल्कि फ़िलिस्तीनी जनता का अपमान है और ऐसा लगता है कि मोहम्मद बिन सलमान फ़िलिस्तीन को कुश्नर को उपहार के तौर पर भेंट करना चाहते हैं।
उधर ट्रम्प को क़ुद्स को इस्राईल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के एलान के बाद, हमास के पोलित ब्यूरो प्रमुख इस्माईल हनीया ने कहा कि क़ुद्स को इस्राईली शासन की राजधानी के रूप में एलान करना, साठगांठ प्रक्रिया का अंत है और अब "शताब्दी की सहमति" जैसी चीज़ हमेशा के लिए दफ़्न हो गयी है।
अमरीका की नई साठगांठ योजना के आधार पर जो "शताब्दी की सहमति" के नाम से सामने आयी है, ट्रम्प एक फ़िलिस्तीनी सरकार का गठन चाहते हैं जिसमें 1967 की सीमाओं की पाबंदी नहीं है और स्वशासित फ़िलिस्तीनी प्रशासन के पास ज़ायोनी शासन से गंभीर बातचीत करने के लिए 90 दिनों का वक़्त है।
यह ऐसी हालत में है कि ज़ायोनी शासन और स्वशासित फ़िलिस्तीनी प्रशासन के बीच साठगांठ वार्ता अप्रैल 2014 से ठंडे बस्ते में पड़ी है जिसका मुख्य कारण ज़ायोनी शासन द्वारा अवैध कॉलोनियों का निर्माण बताया जाता है। (MAQ/N)