पश्चिमी एशिया के अरब देशों पर इस्राईल की बुरी नज़र !
हालांकि कुछ अरब देशों के नेताओं और इस्राईल के मध्य दोस्ती की बात हो रही है लेकिन अगर कोई यह सोचता है कि इस निकटता से अरब देशों को कुछ मिलने वाला है तो वह बहुत बड़ी भूल कर रहा है।
अरबों के बारे में ज़ायोनी शासन के इरादों का पता उस क़ानून के मसौदे से भी चल सकता है जिसे ज़ायोनी शासन के विदेशमंत्रालय के संपत्ति विभाग की ओर से तैयार किया जा रहा है और जिस में इस्राईली सरकार को इस बात पर प्रतिबद्ध किया जाएगा कि वह उन अरब देशों को हर्जाना देने पर बाध्य करे जहां से यहूदियों ने पलायन किया और इस्राईल जाकर बस गये। इस क़ानून की मदद से 400 अरब डॅालर की भारी रक़म अरब देशों से एेंठने की तैयारी की जा रही है।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जिस तरह से अरब देशों को " दुधारू गाय" बता कर अमरीका का खज़ाना भरा है उससे सब अवगत हैं किंतु अब लगता है कि अब इस्राईल भी इसी प्रकार की लूट का मन बना रहा है। यह मसौदा दो हिस्सों पर है पहले हिस्से में मिस्र, मोरितानिया, मोरक्को, अल्जीरिया, लीबिया, सूडान, सीरिया, इराक़, लेबनान, जार्डन और बहरैन से मांग की गयी है कि वह 300 अरब डॅालर की लागत की साढ़े आठ लाख यहूदियों की संपत्ति का हर्जाना दे। मसौदे के दूसरे हिस्से में सऊदी अरब से 100 अरब डॅालर हर्जाना लेने का प्रावधान है।
इस्राईल यह क़ानून एेसी दशा में बनाने का प्रयास कर रहा है कि जब कुछ अरब देशों विशेषकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात और बहरैन इस्राईल से संबंध बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
बहुत खेद की बात है कि कुछ अरब देश, इस्लामी जगत के बजाए अमरीका और इस्राईल के हितों की रक्षा करते हैं ताकि इन देशों के राष्ट्रध्यक्षों की सत्ता सुरक्षित रहे। (Q.A.)