सऊदी राजकुमार भारी राशि देने के बाद रिहा
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समाचारों के अनुसार भारी राशि के भुगतान के बाद सऊदी अरब में भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत गिरफ़्तार किए गए 2 से अधिक राजकुमारों को रिहा कर दिया गया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec २९, २०१७ १६:०७ Asia/Kolkata
  • सऊदी राजकुमार भारी राशि देने के बाद रिहा

समाचारों के अनुसार भारी राशि के भुगतान के बाद सऊदी अरब में भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत गिरफ़्तार किए गए 2 से अधिक राजकुमारों को रिहा कर दिया गया है।

रिहाई पाने वालों में राजकुमार मिशआल बिन अब्दुल्लाह और राजकुमार फ़ैसल बिन अब्दुल्लाह शामिल है। इन दोनों राजकुमारों को भारी राशि के भुगतान के बाद रिहा किया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रिहा हुए दोनों राजकुमार सऊदी अरब के पूर्व शासक शाह अब्दुल्लाह के बेटे हैं और उन्हें राजधानी रियाज़ के कार्लटन होटल में गिरफ़्तार करके रखा गया था, जबकि शाह अब्दुल्लाह के तीसरे बेटे प्रिंस तुर्की बिन अब्दुल्लाह अभी क़ैद में हैं और उनकी रिहाई के संबंध में अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने सऊदी सरकार ने एंटी करप्शन कमेटी बनाकर 11 राजकुमारों और 4 मंत्रियों सहित दर्जनों वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ़्तार कर लिया था। गिरफ़्तार होने वालों में दुनिया के धनी लोगों में शामिल सउदी अरब के राजकुमार वालिद बिन तलाल भी थे।

इस बीच यह ख़बर भी आई थी कि सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने राजकुमार वलीद बिन तलाल से कहा है कि वह 6 अरब डॉलर का भुगतान करके क़ैद से रिहा हो सकते हैं, लेकिन वालिद बिन तलाल ने पैसे देने से मना करते हुए क़ानूनी लड़ाई लड़ने का फ़ैसला किया है।

अरब सूत्रों के मुताबिक़ सऊदी युवराज मुहम्मद बिन सलमान ने सरकारी ख़ज़ाने को भरने का अच्छा तरीक़ा खोजा है और गिरफ़्तार राजकुमारों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उनसे मोटी रक़म वसूल कर रहे हैं। अरब मीडिया के अनुसार मोहम्मद बिन सलमान एक ओर तो भ्रष्टाचार के आरोप में दर्जनों राजकुमारों और मंत्रियों एवं अधिकारियों को गिरफ़्तार कर रहे हैं जबकि दूसरी ओर उनके ऊपर स्वयं भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं पर इस समय सत्ता उनके पास है इसलिए सऊदी युवराज से सवाल करने की किसी में हिम्मत नहीं है।

यूरोपीय मीडिया के सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब शासन की भ्रष्टाचार विरोधी योजना में कुछ अमेरिकी हस्तियां भी शामिल हैं क्योंकि सऊदी अरब में सभी गिरफ़्तारियां अमेरिकी अधिकारियों की ख़ुफ़िया जानकारी पर ही हो रही हैं। (RZ)