फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद नाकारा हैः क़तर
कतर के विदेश मंत्री ने कहा है कि फ़ार्स की ख़ाड़ी सहयोग परिषद बिल्कुल नाकारा हो चुकी है और इस परिषद की विफलता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके सदस्यों के पास मुद्दों को हल करने की शक्ति नहीं है।
स्विट्ज़रलैंड में आयोज़ित दावोस शिखर बैठक को संबोधित करते हुए क़तर के विदेश मंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान आले सानी ने इस बात को स्वीकार किया है कि फ़ार्स की खाड़ी के देशों की सहयोग परिषद के सदस्यों के बीच बहुत अधिक मतभेद पाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि मतभेदों को युद्ध के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता है बल्कि उनका समाधान बातचीत द्वारा संभव है।
क़तर के विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में फ़ार्स की खाड़ी के देशों के बीच मौजूद तनावपूर्ण स्थिति का सबसे पहला समाधान यह है कि क्षेत्र के सभी देश, एक दूसरे की संप्रभुता और अखंडता का पूरी तरह सम्मान करें और किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्ताक्षेप करने से बचें। आले सानी ने यह स्पष्ट किया कि उनका देश किसी भी स्थिति में अपनी संप्रभुता और अखंडता का सौदा नहीं करेगा।
क़तर के विदेश मंत्री ने कहा क्षेत्र के देशों के बीच उत्पन्न हुई राजनीतिक खाई के ही कारण आज मध्यपूर्व के देशों में आतंकवाद, चरमपंथ और कट्टरपंथ पैर पसार रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जो स्थिति है उसके लिए फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद सबसे अधिक ज़िम्मेदार है।
क़तर के विदेश मंत्री ने दावोस शिखर बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मैं दुनिया को यह बता देना चाहता हूं कि चरमपंथी तत्व अपने राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। (RZ)