ट्रंप का अमेरिका: विश्व राजनीति में बल के दबदबे की वापसी
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वाशिंगटन, 01 फरवरी (पार्स टुडे)। 'डोनाल्ड ट्रंप' के राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल में उनकी सरकार की नीतियों ने, सैन्यीकरण पर जोर, सियोनीवादी शासन की बिना शर्त समर्थन और घरेलू दमन में तेजी लाकर, अमेरिका की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है, एक ऐसी तस्वीर जो बहुपक्षवाद और मानवाधिकार मानदंडों से स्पष्ट रूप से दूर है।
(last modified 2026-02-02T13:29:18+00:00 )
Feb ०२, २०२६ १५:०० Asia/Kolkata
  • ट्रंप का अमेरिका: विश्व राजनीति में बल के दबदबे की वापसी
    ट्रंप का अमेरिका: विश्व राजनीति में बल के दबदबे की वापसी

वाशिंगटन, 01 फरवरी (पार्स टुडे)। 'डोनाल्ड ट्रंप' के राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल में उनकी सरकार की नीतियों ने, सैन्यीकरण पर जोर, सियोनीवादी शासन की बिना शर्त समर्थन और घरेलू दमन में तेजी लाकर, अमेरिका की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है, एक ऐसी तस्वीर जो बहुपक्षवाद और मानवाधिकार मानदंडों से स्पष्ट रूप से दूर है।

पिछले वर्ष और चालू वर्ष (2025 और 2026) में अमेरिकी विदेश नीति ने किसी भी पिछले समय की तुलना में सैन्य साधनों और शक्ति के दबदबे पर अधिक निर्भरता दिखाई। वाशिंगटन ने हथियारों का सबसे बड़ा निर्यातक होने का अपना दर्जा बनाए रखते हुए, यमन और लाल सागर के संकटों के बीच, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के साथ बड़े सैन्य अनुबंध किए, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ी और सुरक्षा संतुलन बिगड़ा।

 

यही रुझान पूर्वी एशिया में भी दोहराया गया, जहां ताइवान को लड़ाकू विमानों और मिसाइल रक्षा प्रणालियों की बिक्री ने वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव को एक और संवेदनशील चरण में प्रवेश करा दिया। अधिकृत फिलिस्तीन में, अमेरिका ने सियोनीवादी शासन को गोला-बारूद और उन्नत हथियारों की आपूर्ति तेज करके, व्यावहारिक रूप से गज़ा पर व्यापक हमलों की निरंतरता का समर्थन किया, ऐसे हमले जिनके शिकार, मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, ज्यादातर नागरिक रहे हैं।

 

इसी के साथ, व्हाइट हाउस का तेल अवीव की नीतियों का पूर्ण रूप से पालन इस काल की एक मुख्य विशेषता बन गया। सैन्य सहायता में वृद्धि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आलोचनात्मक प्रस्तावों पर वीटो और वेस्ट बैंक में बस्तियों के निर्माण का समर्थन दर्शाता है कि वाशिंगटन ने न केवल मध्यस्थ की भूमिका छोड़ दी है, बल्कि कब्जे का बिना शर्त समर्थक बन गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अमेरिका का बहिर्गमन भी इसी संदर्भ में देखा जा सकता है।

 

घरेलू मोर्चे पर, कठोर आव्रजन नीतियों और प्रवासियों के व्यापक पैमाने पर निर्वासन ने अमेरिकी समाज का एक सुरक्षा-केंद्रित और बंद चेहरा प्रस्तुत किया। इन सभी घटनाक्रमों ने आज के अमेरिका की ऐसी तस्वीर पेश की है जो अपने सहयोगियों के लिए अप्रत्याशित है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए असुरक्षा और अस्थिरता का एक नया स्रोत है। (AK)

 

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