आले सऊद के लिए यमन बना वियतनाम
सऊदी अरब के लिए यमन अब वियतनाम बन गया है।
इन्डिपेंडेंट समाचारपत्र के एक लेख में कहा गया है कि सऊदी अरब के युवराज की विदेश नीति पूरी तरह से विफल रही है। लेख के अनुसार मुहम्मद बिन सलमान की नीतियां आरंभ से ही अस्पष्ट रही हैं जो हर दिन जटिल होती जा रही हैं। लेबनान तथा क़तर के बारे में भी इन नीतियों के संबन्ध में नकारात्मक प्रतिक्रियाएं आई हैं।
इन्डिपेंडेंट के अनुसार यमन युद्ध में सऊदी अरब को लगातार नुक़सान हो रहा है और अब यमन सऊदी अरब के लिए नया वियतनाम बन चुका है।इससे पहले भी यमन पर हमला करने वालों को मुंह की खानी पड़ी थी। 1960 के दशक में मिस्र ने यमन पर हमला किया था। यमनवासियों के कड़े प्रतिरोध के कारण इस युद्ध में 10 हज़ार से अधिक मिस्री सैनिक मारे गए थे। उस काल के संचार माध्यमों ने इसे मिस्र के सैनिक हस्तक्षेप की संज्ञा दी थी। जानकारों का कहना है कि यमन में विदेशी हस्तक्षेप कभी सफल नहीं रहा है।
सऊदी अरब ने मार्च 2015 में यमन पर इस सोच के साथ हमला किया था कि वह शीघ्र ही अंसारुल्लाह को पराजित कर देगा। अब यमन युद्ध आरंभ हुए लंबा समय बीत जाने के बाद यमन को सऊदी अरब के लिए वियतनाम का नाम दिया जा रहा है। यह इसलिए कहा जा रहा है कि अमरीका को वियतनाम में बहुत ही लज्जाजनक पराजय का मुंह देखना पड़ा था। यह विषय यमन में सऊदी अरब की खुली पराजय का परिचायक है। इस बारे में सऊदी अरब के एक सोशल मीडिया एक्टीविस्ट मुजतहिद का कहना है कि सऊदी अरब की सेना को यमन में खुली पराजय हुई है। वे कहते हैं कि यमन में युद्ध के दौरान सऊदी अरब की सेना को सैनिक, कूटनीतिक और हर प्रकार से विफलता हाथ लगी है। अमरीका के खुले समर्थन के बावजूद सऊदी अरब को यमन में कोई भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल नहीं हो सकी हालांकि रियाज़ इस बात को मानने से इन्कार करता है। टीकाकारों का कहना है कि सऊदी अरब, यमन युद्ध में एेसी दलदल में बुरी तरह से फंस गया है जिससे निकलना उसके लिए कठिन हो चुका है।