मध्यपूर्व के तेल पर अमरीका की बुरी नज़र
मध्यपूर्व के तेल स्रोतों के विरुद्ध अमरीका और ज़ायोनियों के षडयंत्रों पर हिज़बुल्लाह प्रमुख ने कड़ी चेतावनी दी है।
हिज़बुल्लाह के महासचिव ने कहा है कि अमरीका तथा ज़ायोनी शासन के षडयंत्रों के कारण पूरा मध्यपूर्व, तेलयुद्ध के केन्द्र में बदलता जा रहा है। सैयद हसन नसरूल्लाह ने बेरूत में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा है कि वर्तमान समय में अमरीका, मध्यपूर्व में तेल और गैस पर नियंत्रण के लिए युद्ध भड़काने के प्रयास में है।
तेल और गैस के बड़े-बड़े भण्डारों के कारण मध्यपूर्व, सदा से ही अतिग्रहणकारी शक्तियों का लक्ष्य रहा है। यही कारण है कि विश्व के इस स्ट्रैटेजिक क्षेत्र को अबतक विभिन्न षडयंत्रों का सामना करना पड़ा है। इन्हीं षडयंत्रों में से एक, अमरीका की वृहत्तर मध्यपूर्व योजना है जिसके अन्तर्गत मध्यपूर्व के तेल स्रोतों पर नियंत्रण के साथ ही इस्राईल की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाना है। इसी बात के दृष्टिगत कहा जा रहा है कि सीरिया में दाइश की पराजय के बावजूद अमरीका द्वारा सीरिया के परिवेष्टन की संभावना पाई जाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि सीरिया के महत्वपूर्ण तेल स्रोत इस देश के पूर्व में पाए जाते हैं।
इसी के साथ यह बात भी ध्यान योग्य है कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के मध्यपूर्व के विवादित दौरे के बाद फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती देशों के संबन्धों में आरंभ होने वाले तनाव के पीछे भी अमरीका का ही हाथ है जिसका मुख्य उद्देश्य, क़तर के तेल और गैस पर नियंत्रण करना है। इराक़ को भी अमरीका, तेल भण्डार के रूप में देखता है इसीलिए वह वहां पर अपना वर्चस्व बनाने के लिए छावनियां बना रहा है। उधर लेबनान के समुद्री क्षेत्र में स्थित तेल के स्रोतों के निकट इस्राईल की गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। इसी बीच ज़ायोनी शासन के युद्धमंत्री ने दावा किया है कि लेबनान का तेल और गैस का नवां कुआं, ज़ायोनी शासन का है। यह एेसा दावा है जिसका लेबनान में हर स्तर पर कड़ा विरोध किया गया है। इन बातों से पता चलता है कि मध्यपूर्व के तेल स्रोतों के दोहन के लिए अमरीका और इस्राईल किस प्रकार की चालें चल रहे हैं।