कहां है " अरबियन वियतनाम" ?
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कुछ टीकाकारों का कहना है कि जब " मध्यपूर्व का राक्षस" यमन के " मुस्लिम ब्रदरहुड" से बात करने पर तैयार हो जाए तो इसका अर्थ यह है कि यमन अबूधाबी और रियाज़ के लिए " अरबियन वियतनाम" बन रहा है।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Feb १८, २०१८ १८:४१ Asia/Kolkata
  • कहां है

कुछ टीकाकारों का कहना है कि जब " मध्यपूर्व का राक्षस" यमन के " मुस्लिम ब्रदरहुड" से बात करने पर तैयार हो जाए तो इसका अर्थ यह है कि यमन अबूधाबी और रियाज़ के लिए " अरबियन वियतनाम" बन रहा है।

दिसम्बर सन 2017 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस " मुहम्मद बिन सलमान"  संयुक्त अरब इमारात के क्राउन प्रिंस " मुहम्मद बिन ज़ायद" की यमन में " मुस्लिम ब्रदरहुड" शाखा " सुधार के लिए यमनी संगठन" के प्रमुख " मुहम्मद यदूमी" और महासचिव , " अब्दुलवह्हाब अहमद अलअनसी" से रियाज़ में  भेंट काफी अहम थी जिस के बारे में विभिन्न प्रकार के विचार प्रकट किये गये।

संयुक्त अरब इमारात, मिस्र के  " मुस्लिम ब्रदरहुड" संगठन का घोर विरोधी है और इसी लिए संयुक्त अरब इमारात के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट करके जानकारी दी कि  " सुधार के लिए यमनी संगठन" ने "  मुस्लिम ब्रदरहुड" से दूरी बना ली है लेकिन सब को यह पता है कि यह केवल बहाना है और हक़ीक़त यह है कि यमन के दलदल से निकलने के लिए संयुक्त अरब इमारात को यह रेड लाइन पार करके अपने सब से बड़े दुश्मन से बात करनी पड़ी।

मध्यपूर्व के शैतानों की जोड़ी

 

     संयुक्त अरब इमारात के शासकों ने हालिया वर्षों में राजनीतिक इस्लाम और विशेष कर मुस्लिम ब्रदरहुड के खिलाफ संघर्ष के लिए ट्यूनेशिया, लीबिया, मिस्र, क़तर जैसे दुनिया के कई देशों में व्यापक स्तर पर प्रयास किये लेकिन अब यमन के दलदल से निकलने के लिए जिसे  " अरबियन वियतनाम" कहा जाता है, उसी मुस्लिम ब्रदरहुड से वार्ता पर मजबूर हो गये।

संयुक्त अरब इमारात में 100 राजनीतिक बंदी हैं जिन्हें मुस्लिम ब्रदरहुड से संपर्क के आरोप में जेल में बंद किया गया है और उसने मुस्लिम ब्रदरहुड की मदद का आरोप लगा कर क़तर से संबंध खराब कर लिए हैं मगर अब यही संयुक्त अरब इमारात मुस्लिम ब्रदर हुड से बात कर रहा है और इसके लिए उसके पास केवल एक ही बहाना है और वह है " ईरान "।

दर अस्ल यमन के पूर्व तानाशाह अली अब्दुल्लाह सालेह की मौत के बाद सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात को विकल्प की तलाश है क्योंकि यमन में ताक़त का पलड़ा अन्सारुल्लाह की ओर झुक गया है।

अब्दुल्लाह सालेह से अबूधाबी व रियाज़ को बड़ी उम्मीद थी 

 

संयुक्त अरब इमारात के क्राउन प्रिंस " मुहम्मद बिन ज़ायद " को कुछ लोग " मध्य पूर्व का राक्षस" भी कहते हैं,  अबूधाबी में परमाणु प्रतिष्ठान पर मिसाइली हमले और अली अब्दुल्लाह सालेह की मौत के बाद यह समझ में  आ गया कि " अरबियन वियतनाम" उनके और सऊदी अरब के लिए अब नर्क बन चुका है।

मध्य पूर्व में क्राउन प्रिंस की यह जोड़ी इस इलाक़े में कभी भी बड़े युद्ध की आग भड़का सकती है क्योंकि अब वह " अरबियन वियतनाम" से निकलने के लिए इस्राईल और अमरीका को हर हाल में और हर तरह से " खुश" करने की कोशिश कर रहे हैं अलबत्ता उन्हें यह पता होना चाहिए कि वियतनाम में अमरीका का क्या हाल हुआ था। (Q.A.)