यमन मानवता विरोधी कार्यवाहियों की प्रदर्शनी बन गया है
यह बात सबको ज्ञात है कि सऊदी अरब ने अमेरिका की हरी झंडी मिलने के बाद यमन पर हमला किया और अमेरिकी विमान चालक और युद्धक विमान इस हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस यह दिखाने के प्रयास में हैं कि ईरान यमन के लिए हथियार भेजता है इस कार्य से वे यमन में सऊदी अरब के अपराधों और अपने क्रिया- कलापों से विश्व जनमत का ध्यान हटाना चाहते हैं।
इन देशों ने 26 फरवरी को सुरक्षा परिषद में पेश करने के लिए एक प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है जिसकी अभी समीक्षा की जा रही है।
यह ऐसा विषय है जिसकी कोई वास्तविकता नहीं है और मध्यपूर्व में ईरान की जो रचनात्मक भूमिका है इस प्रस्ताव में उसे लक्ष्य बनाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र संघ में अमेरिकी राजदूत ने इससे पहले दो बार एक लोहे का टुकड़ा दिखाया था और दावा किया था कि यह उस मिसाइल का टुकड़ा है जो यमनी सेना ने रियाज़ पर मारा था और वह ईरान का बना हुआ था।
इस कार्य से अमेरिकी राजदूत ने यह दिखाने की चेष्टा की थी कि यमन संकट के जारी रहने और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के लिए ईरान ज़िम्मेदार है और वह यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के लिए हथियार भेजता है।
जब से डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तब से उन्होंने राष्ट्रसंघ में ईरान की निंदा कराने के लिए बहुत प्रयास किया है परंतु पश्चिम एशिया के संवेदनशील क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों के बारे में ईरान की रचनात्मक व स्पष्ट नीति के कारण हर बार अमेरिका को ईरान के मुकाबले में राजनीतिक पराजय का सामना हुआ।
यह बात सबको ज्ञात है कि सऊदी अरब ने अमेरिका की हरी झंडी मिलने के बाद यमन पर हमला किया और अमेरिकी विमान चालक और युद्धक विमान इस हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सऊदी अरब की अगुवाई में बना गठबंधन यमन में अमेरिका और ब्रिटेन के बने प्रतिबंधित हथियारों का प्रयोग कर रहा है जिससे यमन मानवता विरोधी कार्यवाहियों और युद्धअपराध की प्रदर्शनी बन गया है।
इस प्रकार की स्थिति में यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के लिए हथियार भेजने पर आधारित आरोप का लक्ष्य वास्तविकता को उल्टा दिखाना है और यह ऐसा बचकाना व झूठा आरोप है जिससे यमन में किये जा रहे अतिक्रमणकारियों के अपराधों पर पर्दा डालने में कोई सहायता नहीं मिलेगी। MM