यमन युद्ध में अमेरिका की भूमिका बहुत अधिक हैः चार्ल्ज़ स्मेट्स
Feb २६, २०१८ १६:३६ Asia/Kolkata
अमेरिकी विशेषज्ञ चार्ल्ज़ स्मेट्स कहते हैं कि दाइश से मुकाबला करने वाले कंपेन के माध्यम से अमेरिका सीधे रूप से और सऊदी अरब का परोक्षरूप से समर्थन करके यमन युद्ध में भूमिका निभा रहा है।"
अमेरिका, सऊदी अरब और इस्राईल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान को ख़तरा दर्शाने के लिए यथावत प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने हालिया महीनों में ईरान की मिसाइल क्षमता और यमन के लिए मिसाइल भेजे जाने को बहाना बनाया और उनकी गतिविधियों के केन्द्र यही विषय रहे हैं।
रोचक बात है कि यह उस स्थिति में है जब यमन की निर्दोष जनता अमेरिका और ब्रिटेन के उन प्रतिबिंधित हथियारों की भेंट चढ़ रही है जो इन देशों ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात को दिये हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी अपने अमानवीय फैसलों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों की उपेक्षा व अवहेलना कर दी है। मध्यपूर्व मामलों के एक अमेरिकी विशेषज्ञ प्रोफेसर चार्ल्ज़ स्मेट्स (Charles chmates) कहते हैं कि यमन युद्ध में अमेरिका की भूमिका बहुत अधिक है। अलकायदा से मुकाबला करने वाले कंपेन के माध्यम से अमेरिका सीधे रूप से और सऊदी अरब का परोक्षरूप से समर्थन करके यमन युद्ध में भूमिका निभा रहा है।"
यह समर्थन अब ख़तरनाक चरण में प्रवेश कर गया है और ईरानोफोबिया को गति प्रदान कर दी है। यमन के संबंध में ईरान के खिलाफ राष्ट्रसंघ में जो प्रस्ताव पेश किया जाने वाला है उसके मसौदे के संबंध में राष्ट्रसंघ में संयुक्त अरब इमारात के राजदूत ने कहा है कि यह देश इस मसौदा का समर्थन करता है।
वास्तविकता यह है कि यमन युद्ध में शक्ति का समीकरण परिवर्तित हो गया है और इस युद्ध में विजय यमनी जनता के अदम्य साहस व प्रतिरोध के कारण सऊदी अरब और उसके घटकों व समर्थकों के लिए दुःस्वप्न में परिवर्तित हो गयी है और सऊदी अरब तथा उसके घटकों को यह बात अच्छी तरह पता हो गयी है कि वे यमन में कोई सैनिक व राजनीतिक बदलाव नहीं कर सकते इसलिए अपनी विफलता से आम जनमत का ध्यान हटाने के लिए ईरान के खिलाफ निराधार आरोप लगा रहे हैं और इस कार्य से भी उनको कोई सहायता नहीं मिलेगी। MM
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