अमरीकी गठबंधन दाइश की वायु सेना का काम कर रहा है!
सीरिया में अमरीका के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुत भयानक खेल खेल रहा है।
अमरीका के गठबंधन में शामिल देश सीरिया के भीतर उन संगठनों की मदद कर रहा हैं जो सीरियाई सरकार और जनता के विरुद्ध युद्धरत हैं। हालत यह हो गई है कि राष्ट्रपति बश्शार असद ने बयान दिया है कि अमरीकी नेतृत्व वाला गठबंधन सीरिया में दाइश की वायु सेना का काम कर रहा है।
सीरिया के राष्ट्रपति ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पश्चिमी देश सीरिया पर बार बार आरोप लगा रहे हैं कि उसने रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया है, यह आरोप सीरियाई सरकार से विशिष्टताएं लेने की कोशिश के तहत हैं। उनका कहना था कि अमरीका और पश्चिमी सरकारें जब भी सीरियाई सेना के घेरे में आ चुके आतंकियों की मदद करना चाहते हैं तो एक हथकंडा यह अपनाते हैं कि सीरियाई सरकार पर रासायनिक हथियार प्रयोग करने के आरोप लगाने लगते हैं अतः एक प्रकार से वह इस मुद्दे को सीरियो को ब्लैकमेल करने के लिए प्रयोग कर रहे हैं। यह बड़ी बेशर्मी की बात है कि दाइश और आतंकवाद से लड़ने के नाम पर बना अमरीकी गठबंधन दाइश और अन्नुस्रा की खुलकर मदद कर रहा है।
पूर्वी ग़ूता के इलाक़े में भी यही ड्रामा चल रहा है। पूर्वी ग़ूता में छिपे आतंकी इस इलाक़े से राजधानी दमिश्क पर मार्टर गोले फ़ायर करते रहते थे जिसमें दर्जनों आम नागरिक मारे गए। सीरियाई सेना ने बहुत अधिक संयम बर्ता क्योंकि पूर्वी ग़ूता का इलाक़ा आस्ताना में होने वाली वार्ता के आधार पर कम तनाव वाले क्षेत्रों में शामिल था अतः इस इलाक़े में सैनिक आप्रेशन से बचना सीरियाई सरकार की प्राथमिकता थी लेकिन राजधानी दमिश्क़ की सुरक्षा के लिए जब इसी इलाक़े से ख़तरा उत्पन्न होने लगा तो आतंकियों पर अंकुश लगाना सीरियाई सरकार के लिए ज़रूरी हो गया। इस समय सीरियाई सेना पूर्वी ग़ूता के इलाक़े को आतंकियों के चंगुल से पूरी तरह मुक्त कराना चाहती है।
सीरिया ने अमरीका, फ़्रांस, ब्रिटेन, सऊदी अरब, क़तर, इमारात, तुर्की और इस्राईल की भयानक साज़िश को अपने घटकों की सहायता से नाकाम बना दिया तो जहां यह सीरियाई सरकार की बड़ी सफलता है वहीं सीरिया के घटकों की भी बहुत बड़ी विजय है। सीरिया के घटकों ईरान, इराक़, हिज़्बुल्लाह लेबनान और रूस शामिल हैं।
ईरान हिज़्बुल्लाह और ख़ुद सीरिया वह ताक़तें हैं जिनका मज़बूत होना अमरीका और इस्राईल के लिए बहुत बुरी ख़बर है। जैसे ही सीरिया में पूरी तरह शांति बहाल हुई अमरीका और इस्राईल की नींद और भी हराम हो जाएगी। सीरिया को निशाना भी इसी लिए बनाया गया कि वह अमरीका और इस्राईल के सामने प्रतिरोध करने वाले क्षेत्रीय मोर्चे में बड़ी महत्वपूर्ण स्थिति का स्वामी देश है।
पश्चिमी देशों ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए तालेबान का गठन किया और सीरिया और इराक़ में अपने लक्ष्य पाने के लिए दाइश और अन्नुस्रा की मदद की। दोनों ही स्थानों पर अमरीका और उसके घटकों की नीतियों की बहुत बड़ी क़ीमत क्षेत्रीय देशों को चुकानी पड़ी क्योंकि इन नीतियों के कारण आतंकवाद को बढ़ावा मिला। अलबत्ता यह भी साबित हो चुका है कि आतंकवाद को हथियार के रूप में प्रयोग करना आत्महत्या से कम नहीं है। देखना यह है कि अमरीका और उसके घटक देश, सीरिया में आत्महत्या की यह कोशिशें कब तक जारी रखेंगे? पूर्वी ग़ूता के इलाक़े की बात की जाए तो एक तिहाई भाग आतंकियों से ख़ाली कराया जा चुका है और सीरियाई सरकार और सेना का कहना है कि पूरे क्षेत्र को आतंकियों से वापस लेने तक सैनिक आप्रेशन जारी रहेगा जबकि इस बीच आम नागरिकों के इस बस्ती से बाहर निकलने के लिए सुरक्षित रास्ते भी खुले रहेंगे। जैसे जैस आतंकी संगठनों का सफ़ाया हो रहा है अमरीका के हाथ से तुरुप के पत्ते निकलते जा रहे हैं।