सीरिया पर हमले की सोच, पागलपन या नज़रों का धोखा?
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रूस द्वारा सीरिया के पूर्वी ग़ोता के आप्रेशन में सीरिया सरकार, सेना, ईरान और प्रतिरोधक मोर्चे के भरपूर समर्थन और ठोस नीति अपनाए जाने के कारण पश्चिम सीधे रूप से रूस से टकराने और उसके नुक़सानों को सहन करने की स्थिति में नहीं है क्योंकि उसे पता है कि यह एक व्यापक युद्ध और विश्व युद्ध की भूमिका बन सकता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १५, २०१८ १३:०६ Asia/Kolkata
  • सीरिया पर हमले की सोच, पागलपन या नज़रों का धोखा?

रूस द्वारा सीरिया के पूर्वी ग़ोता के आप्रेशन में सीरिया सरकार, सेना, ईरान और प्रतिरोधक मोर्चे के भरपूर समर्थन और ठोस नीति अपनाए जाने के कारण पश्चिम सीधे रूप से रूस से टकराने और उसके नुक़सानों को सहन करने की स्थिति में नहीं है क्योंकि उसे पता है कि यह एक व्यापक युद्ध और विश्व युद्ध की भूमिका बन सकता है।

अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका की प्रतिनिधि निकी हेली ने एक खुले बयान में सीरिया को धमकी दी थी कि यदि पूर्वी ग़ोता में सीरिया सरकार युद्ध जारी रखती है कि सीरिया पर सैन्य हमला कर दिया जाएगा। अभी अमरीका की प्रतिनिधि ने धमकी ही दी थी कि रूस की संयुक्त सेना के प्रमुख ने निकी हेली का जवाब देते हुए कहा कि रूस की सेना, सीरिया पर हर प्रकार के हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।

सवाल यह पैदा होता है कि क्या अमरीका और पश्चिम सीरिया की शईरात सैन्य छावनी पर क्रूज़ मीज़ाइलों के अपने हमले के अनुभव से लाभ उठाते हुए सीरिया पर सैन्य हमले का रिस्क ले सकते हैं या उनमें रूस से टकराने का साहस नहीं है।

पिछले एक वर्ष के दौरान, हलब की स्वतंत्रता और रूस तथा ईरान के भरपूर सैन्य समर्थन से सीरिया की सेना की ज़बरदस्त प्रगति से अमरीका और पश्चिम सीरिया की बिसात पर स्वयं को पिटा हुआ मोहरा समझ रहे हैं और एक प्रकार से उन्होंने सीरिया से अपने हाथ खींच लेने का फ़ैसला कर लिया है।

पश्चिम ने सीरिया के मोर्चे में प्रतिस्पर्धा के महत्व के कारण, तथा क्षेत्र में ईरान और रूस के बढ़ते प्रभाव की वजह से कभी भी दाइश के बाद नये मध्यपूर्व की योजना से अपना हाथ पीछे नहीं खींचा है। अमरीका और पश्चिम, सीरिया संकट के आरंभ से ही सैन्य हस्तक्षेप के लिए पर तोल रहे थे, कभी उन्होंने सीरिया में रासायनिक हमलों का बहाना बनाकर हमले का प्रयास किया और कभी सुरक्षा परिषद में सीरिया मुद्दे को पेश करके सैन्य हमले की योजना बनाई किन्तु हर बार ही उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा।

सीरिया के मुद्दे पर अमरीका और पश्चिम की बौखलाहट को शुक्रवार की शाम डोनल्ड ट्रम्प की टेलीफ़ोनी काल में देखा जा सकता है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने फ़्रांस के राष्ट्रपति एमैनुलए मैक्रांन और जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल से टेलीफ़ोन वार्ता में धमकी भरे लहजे में कहा कि यदि सीरिया की सरकार ने पूर्वी ग़ोता के विरुद्ध आप्रेशन नहीं रोका तो सैन्य कार्यवाही कर दी जाएगी।

फ़्रांस के राष्ट्रपति ने भी इस टेलीफ़ोनी वार्ता के एक दिन बाद कहा कि यदि सीरिया की सेना ने रासायनिक हमला किया और आम नागरिकों को निशाना बनाया तो पेरिस, सीरिया में प्रतिष्ठानों पर लक्ष्यपूर्ण हमले करने को तैयार है। इसी से मिलता जुलता बयान निकी हेली ने भी दिया और धमकी दी कि यदि संयुक्त राष्ट्र संघ ने पूर्वी ग़ोता में सीरियाई सेना के हमलों पर प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की तो वाशिंग्टन सीरिया में कार्यवाही कर देगा।

बहरहाल सीरिया पर हमले का पश्चिम और अमरीका का सपना चकनाचूर हो गया है और रूस की उपस्थिति से अमरीका और पश्चिम बुरी तरह बौखलाए हुए हैं जबकि ज़मीन पर ईरान का सैन्य परामर्श, हिज़्बुल्लाह की कार्यवाही और सेना की दिन प्रतिदिन प्रगति से पश्चिम और अमरीका के नये मध्यपूर्व के एजेन्डे की हवा निकलती दिखाई पड़ रही है। (AK)