अचानक यमन की मिसाइल ताक़त ने कैसे बदल दिए हैं समीकरण
यमन युद्ध का शिकार है। इस ग़रीब देश पर मार्च 2015 से सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन हवाई हमले कर रहा है और ज़मीनी हमले भी किए जा रहे हैं।
अब इस युद्ध का चौथा साल शुरू हो चुका है। राजधानी सनआ में सर्वोच्च राजनैतिक परिषद के प्रमुख सालेह सम्माद ने एक भाषण में कहा कि यह चौथा साल बैलेस्टिक मिसाइलों का साल होगा, आने वाले दिनों में हर दिन मिसाइल हमले किए जाएंगे और सऊदी अरब चाहे जितनी मिसाइल डिफ़ेन्स व्यवस्था लगा ले वह हमारे मिसाइलों के हमलों से बच नहीं पाएगा।
यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों ने युद्ध का चौथा साल शुरू होने के बाद से लगभग हर दिन मिसाइल हमला किया है लेकिन हाल ही में यमन की सेना और स्वयंसेवी बल ने एक ही दिन में सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ सहित कई शहरों पर एक साथ पांच मिसाइल फ़ायर करके तहलका मचा दिया।
यमन ने इस तरह यह संदेश दे दिया है कि युद्ध के चौथे साल मे मिसाइलों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी। युद्ध के बीते तीन सालों को जायज़ा लिया जाए तो मिसाइल हमले कभी कभार होते थे और कभी कभी तो तीन महीने का अंतराल हो जाता था। इससे पहले बस एक बार ही एसा हुआ था कि एक साथ तीन मिसाइल फ़ायर किए गए थे।
सऊदी अरब का हमला शुरू होने से पहले यमन की सेना के पास अलग अलग प्रकार के मिसाइल मौजूद थे जिनकी संख्या 5000 तक बताई जाती है। यह ज़मीन से ज़मीन पर कम दूरी की मार करने वाले मिसाइल थे। यही कारण था कि जब यमन पर सऊदी अरब के नेतृत्व में कई देशों ने अचानक हमला कर दिया तो इन मिसाइलों की कोई उपयोगिता नहीं रही। यमन के पास कुछ मिसाइल ज़मीन से हवा में मार करने वाले भी थे लेकिन उनका कोई फ़ायदा इसलिए नहीं था कि वह बहुत पुराने थे जबकि यमन पर हमले के लिए आधुनिक युद्धक विमान प्रयोग हो रहे हैं।
तो यमन के पास मिसाइलों की संख्या तो कम नहीं थी लेकिन उनकी उपयोगिता पर संदेह था यही कारण है कि यमन की सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन ने युद्ध में मिसाइलों को शामिल नहीं किया। अगर मिसाइल प्रयोग किए भी गए तो यमन के भीतर ही सऊदी अरब के किराए के लड़ाकों को निशाना बनाने के लिए किए गए। यही कारण था कि सऊदी अरब के अधिकारियों ने दावा करना शुरू कर दिया कि यमन के मिसाइल भंडार शुरू में ही ध्वस्त कर दिए गए और अब यमन के पास मिसाइलों की ताक़त नहीं है।
पिछले तीन वर्षों में यमन ने ज़मीन से ज़मीन पर मार करने वाले कुछ मिसाइलों से सऊदी अरब के कुछ दक्षिणी इलाक़ों को निशाना बनाया और पुराने मिसाइलों से युद्धक विमानों और हेलीकाप्टरों को निशाना बनाया। समुद्र में दुशमन की नौकाओं पर भी मिसाइल फ़ायर किए गए। लगभग यह सारे ही हमले परीक्षण का हिस्सा थे। इस बारे में यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों ने कई बार कहा भी था कि मिसाइल हमले परीक्षण का हिस्सा हैं। अर्थात बड़ी मेहनत ने इन मिसाइलों को जो अनुपयोगी हो चुके थे उपयोगी बनाने की प्रक्रिया चल रही थी।
यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों ने मेहनत ने इन मिसाइलों की मारक दूरी बढ़ाई और मिसाइल फ़ायर करने की तकनीक को अपडेट कर लिया क्योंकि यमन की वायु सीमा पर सऊदी अरब का नियंत्रण है तीसरी चीज़ यह हुई कि इन मिसाइलों को राडार तथा मिसाइल ढाल व्यवस्था को नाकाम बनाने के क़ाबिल बना दिया गया।
तीन साल की मेहनत से अब नतीजा यह है कि यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों की मिसाइल ताक़त बिल्कुल नए चरण में पहुंच गई है और युद्ध में इन मिसाइलों की उपयोगिता का लोहा सब मानने लगे हैं।
कुछ हज़ार डालर में तैयार हो जाने वाले यह मिसाइल अब 5 से 7 मिलियन डालर के अमरीका निर्मित पैट्रियट मिसाइलों को मुंह चिढ़ा रहे हैं।
यमनी राष्ट्र ने अपनी योग्यता से ख़ुद को मज़बूत बनाया है और युद्ध के समीकरणों को बिल्कुल नया रुख दे दिया है। इसके साथ ही अब यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों ने ड्रोन विमानों का प्रयोग भी बड़े पैमाने पर शुरू कर या है। जिसका मतलब यह है कि सऊदी अरब के लिए अब यह युद्ध और भी कठिन हो गया है। सऊदी अरब का मामला यह है कि वह दुनिया भर से हथियार ख़रीद रहा है कहीं मर्ज़ी से कहीं अमरीका और फ्रांस जैसे देशों को ख़ुश करने के लिए लेकिन क्या इस तरह सऊदी अरब ख़ुद को ताक़तवर बना सका है।