सीरिया पर पश्चिम का हमला विश्व शांति के लिए कितना ख़तरनाक!
आख़िरकार पश्चिम ने सीरिया पर हमले की अपनी धमकी को व्यवहारिक कर दिखाया और अमरीका, फ़्रांस तथा ब्रिटेन ने शनिवार तड़के सीरिया की राजधानी दमिश्क़ और हुम्स के कुछ क्षेत्रों पर मीज़ाईल व हवाई हमले किए।
पश्चिम बहुत पहले से सीरिया पर हमले के बहाने की तलाश में था ताकि दमिश्क़ सरकार को कमज़ोर करे। पश्चिम ने आतंकवादी गुटों पर बहुत अधिक पूंजिनिवेश कर रखा था इस उम्मीद के साथ कि बश्शार असद की क़ानूनी सरकार को गिरा ले जाएगा लेकिन अब उसे अपनी सारी उम्मीद ख़ाक में मिलती दिखाई दे रही है। पश्चिम शुरु से ही इस कोशिश में है कि किसी भी बहाने से दमिश्क़ सरकार को कमज़ोर करे। यह विषय सीरियाई सेना और उसके घटकों की निरंतर सफलता और आतंकवादी गुटों की निरंतर हार से और स्पष्ट हो जाता है। पश्चिम को सीरिया पर हमले के लिए ज़रूरी बहाना आतंकवादी गुट जैशुल इस्लाम ने मुहैया करा दिया यह दावा करते हुए कि 7 अप्रैल को पूर्वी ग़ोता के दूमा शहर पर रासायनिक हमला हुआ है। इसके बाद अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस ने सीरिया के ख़िलाफ़ संयुक्त हमले की धमकी दी। सीरियाई सरकार ने इस केमिकल हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता को ख़ारिज किया और मॉस्को ने भी रासायनिक हथियार के इस्तेमाल को आतंकियों की ध्यान खीचने की घृणित शैली माना। मॉस्को की नज़र में सीरिया के ख़िलाफ़ पश्चिम का नया हमला अमरीका की अगुवाई में पश्चिम के एकपक्षीय व्यवहार का एक और नमूना है जिसके नतीजे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता बढ़ेगी और विश्व शांति ख़तरे में पड़ेगी। पश्चिमी देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दृष्टिकोण की अनदेखी करते हुए सैन्य हमले सहित एकपक्षीय कार्यवाही करते हैं। मॉस्को की नज़र में पश्चिम का यह रवैया सुरक्षा परिषद के कर्तव्य में विघ्न पैदा होने तथा अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अराजकता फैलने का कारण बनेगा। इसलिए यह कहा जा सकता है कि अगर सीरिया के ख़िलाफ़ पश्चिम का हमला जारी रहा तो मॉस्को भी गंभीर प्रतिक्रिया दिखाएगा। पश्चिम इस हमले को सीरिया के बारे में रूस के साथ वार्ता में तुरुप का इक्का समझ रहा है। दूसरी ओर मॉस्को पश्चिम की इच्छाओं के सामने डट हुआ है, सीरिया की सरकार व बश्शार असद के बाक़ी रहने पर बल दे रहा है और वह सीरिया में सत्ता के ढांचे में आतंकवादी गुटों को किसी भी तरह की भागीदारी के ख़िलाफ़ है।(MAQ/T)