सीरिया पर हमला और तुर्क अधिकारियों का बयान
सीरिया पर अमरीका और उसके घटकों के हमले के समाचार सामने आने के कुछ घंटे बाद तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने इस हमले और सीरिया के हालिया हालात के बारे में रूस और फ़्रांस के राष्ट्रपतियों से टेलीफ़ोनी वार्ता की।
रजब तैयब अर्दोग़ान ने जिन्होंने इससे पहले सीरिया पर अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस के हमले को उचित और सही क़रार दिया था, कूटनयिक बयान देते हुए अपने रूसी समकक्ष विलादीमीर पुतीन से टेलीफ़ोनी वार्ता में कहा कि क्षेत्र में मौजूद तनाव को इससे अधिक नहीं बढ़ना चाहिए।
तुर्क राष्ट्रपति ने इसी प्रकार फ़्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रां से टेलीफ़ोनी वार्ता में सीरियाई जनता की शांति और सुरक्षा को व्यवहारिक बनाने के लिए राजनैतिक समाधान को आवश्यक बताया।
अमरीका ने ब्रिटेन और फ़्रांस के साथ मिलकर शनिवार की सुबह दमिश्क़ सरकार पर रासायनिक हमले का बहाना लगाकर सैन्य कार्यवाही कर दी। यह हमले, पूर्वी ग़ोता के दूमा क्षेत्र में कथित रासायनिक हमले का बहाना बनाकर किए गये । दूमा में रासायनिक हमले का दावा अभी तक सिद्ध नहीं हो सका जैसा कि वर्ष 2003 में इराक़ में रासायनिक हथियारों के पाए जाने के बारे में अमरीका और उसके पश्चिमी देशों घटकों के दावों की अभी तक पुष्टि नहीं की जा सकी है।
रोचक बिन्दु यह है कि सीरिया पर अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस के सैन्य हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पेश किए जाने वाले दृष्टिकोणों के साथ तुर्की भी हो लिया है। तुर्क अधिकारी हर स्थिति में उसी तरह ढलने का प्रयास करते हैं और यदि इस काम के लिए उन्हें भारी क़ीमत ही क्यों न अदा करनी पड़े।
सीरिया संकट के आरंभ में तुर्की, अमरीका और पश्चिमी देशों के साथ था और वह हमेशा से बश्शार असद को सत्ता से हटाने पर बल देता रहा है किन्तु हालिया परिवर्तनों के बाद वह अमरीका से कुछ दूर हो गया और रूस तथा क्षेत्रीय देशों के साथ हो गया। (AK)