सीरियाई सैन्य ठिकाने पर फिर से इस्राईली हमले का क्या मक़सद?
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जब भी सीरियाई सेना जंग के मैदान में कोई बड़ी कामयाबी हासिल करती है या किसी बड़े क्षेत्र को आतंकवादियों से स्वतंत्र कराती है तो इस्राईल की चिंता बढ़ जाती है और वह सीरिया के किसी ठिकाने पर मिसाइल हमला करता है या फिर युद्धक विमानों से बमबारी करता है ताकि इस्राईली में जनता को यह बता सके कि वह अब भी ताकतवर है और इलाक़े में सब से आगे है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul १०, २०१८ १०:५९ Asia/Kolkata
  • सीरियाई सैन्य ठिकाने पर फिर से इस्राईली हमले का क्या मक़सद?

जब भी सीरियाई सेना जंग के मैदान में कोई बड़ी कामयाबी हासिल करती है या किसी बड़े क्षेत्र को आतंकवादियों से स्वतंत्र कराती है तो इस्राईल की चिंता बढ़ जाती है और वह सीरिया के किसी ठिकाने पर मिसाइल हमला करता है या फिर युद्धक विमानों से बमबारी करता है ताकि इस्राईली में जनता को यह बता सके कि वह अब भी ताकतवर है और इलाक़े में सब से आगे है।

     सीरियाई सेना जार्डन की सीमा पर दस्तक दे रही है और उसके जवानों ने उस सीमावर्ती पास से आतंकवादियों का झंडा उतार दिया जो वर्षों से वहां लहरा रहा था यही वजह है कि इस्राईल ने उस जगह पर बमबारी कर दी यह वास्तव में आतंकवादियों की हार से इस्राईल के दुख का चिन्ह है।

    गत तीन महीनों के दौरान, हिम्स प्रान्त में स्थित तीफूर सैन्य छावनी पर इस्राईल ने तीसरी बार बमबारी की है और बार बार की जाने वाली बमबारी इस बात का सूबूत है कि इस्राईल के हमले बुरी तरह से नाकाम रहे हैं इसी लिए वह बार बार हमले करके कामयाबी चाहता है अलबत्ता थोड़ा बहुत नुकसान हुआ है जो युद्ध के दौरान आम बात है।

तीन वर्षों में 100 हमले कर चुके हैं सीरियाई में इस्राईली  विमान 

    इस्राईली वायु सेना के पूर्व प्रमुख ने स्वीकार किया है कि गत तीन वर्षों के दौरान, इस्राईली विमानों ने 100 से अधिक बार सीरिया में हमले किये हैं उनकी इस स्वीकारोक्ति से भी यह साबित होता है कि अमरीका के दिये हुए अत्याधुनिक विमानों से की जाने वाली बमबारी का कोई लाभ इस्राईल को नहीं मिला है, न सीरियाई सरकार कमज़ोर हुई और न ही उसके सैनिकों का हौसला पस्त हुआ और इस्राईल की बमबारी और आतंकवादियों के हमले के बीच सीरियाई सेना, आतंकवादियों के नियंत्रण से 90 प्रतिशत क्षेत्र स्वतंत्र कराने में सफल हुई और अब सीरियाई शरणार्थी अपने देश वापस लौट रहे हैं।

     लगभग दो वर्षों से इस्राईली प्रधानमंत्री नेतेन्याहू और रक्षा मंत्री लेबरमैन धमकी दे रहे हैं कि वह किसी भी दशा में ईरान को सीरिया में पैर जमाने और सीरिया को इस्राईल के खिलाफ प्रयोग किये जाने की अनुमति नहीं देंगे, लेकिन उनकी धमकियों का सीरियाईयों या ईरानियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और सीरियाई सेना, ईरान  और हिज़बुल्लाह की मदद से आगे बढ़ती और विजय प्राप्त करती रही।

    अगर नेतेन्याहू अपनी धमकी को व्यवहारिक बना सकते और ईरान की सैन्य उपस्थिति को खत्म करने की ताक़त रखते तो फिर आतंकित होकर बुधवार को मास्को किस लिए लिए भाग रहे हैं? जो इस साल उनकी तीसरी मास्को यात्रा है वह भी एसी हालत में कि उन्हें विश्व की सब से बड़ी ताक़त कहे जाने वाले अमरीका का आशीर्वाद प्राप्त है?

एक साल में तीसरी बार नेतेन्याहू पुतीन की शरण में!

 

     सीरिया पर इस्राईली युद्धक विमानों की बमबारी का कोई असर नहीं हो रहा है और अब तो यह क्षेत्रीय मीडिया में दूसरे दर्जे की खबर बन चुकी है और अगर सीरिया इन हमलों का जवाब नहीं दे रहा है तो उसकी वजह यह है कि उसके पास अभी करने के लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण काम हैं लेकिन जवाब में यह विलंब अधिक दिनों तक नहीं रहने वाला है हमें तो यही लगता है।(Q.A.)   (साभार, अब्दुलबारी अतवान, रायुलयौम)

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