वाइट हेलमेट्स के पीछे का षड्यंत्र, दुनिया है हैरान+ फ़ोटो
वाइट हेलमेट्स नामक गुट सीरिया से इस्राईल की ओर फ़रार करा दिए गये और उन्हें जार्डन में बसाया गया है, अलबत्ता उन्हें यूरोप या पश्चिम देश ले जाने के लिए तीन महीने का अवसर दिया गया है।
अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या इन तीन महीनों के बीच उन्हें संभावित रूप से फिर से सीरिया लौटाया जाएगा? क्या इस्राईल की ओर उनका फ़रार होना, इस्राईल और पश्चिम पर उनकी निर्भरता की पुष्टि नहीं है? क्या वाइट हेलमेट्स नामक गुट का जार्डन स्थानांतरण, सीरिया की सरकार और राष्ट्र के विरुद्ध इस्राईल और पश्चिम के नर्म युद्ध की भूमिका तो नहीं है?
वाइट हेलमेट्स नामक तथाकथित जनसेवी गुट के 800 सदस्यों को ऐसी स्थिति में जार्डन में शरण दी गयी है और तीन महीनों के भीतर उन्हें यूरोप पहुंचाने का मौक़ा दिया जाएगा कि यह गुट इस्राईल के रास्ते सीरिया से फ़रार होने में सफल रहा है।

ऐसी स्थिति में जब दक्षिणी सीरिया में आतंकवादियों के ख़िलाफ़ घेरा तंग हो गया है और इस युद्ध से उनके लिए भागना लगभग असंभव हो गया है, अब आतंकवादियों के पास केवल दो रास्ते बचे हैं या तो वह युद्ध जारी रखते हुए सीरिया की सेना के हाथों मारे जाएं या फिर सेना के सामने आत्मसमर्पण करके सीरिया की राष्ट्रीय शांति प्रक्रिया में शामिल हो जाएं या देश के उत्तरी भागों की ओर चले जाएं जहां उनके अन्य साथी मौजूद हैं।

इसी बीच वाइट हेलमेट्स नामक गुट ने इस्राईल से संपर्क करने को वरीयता देने के साथ ज़ायोनी शासन के समर्थन से जार्डन की ओर फ़रार करने का रास्ता चुना। अब सवाल यह है कि वाइट हेलमेट्स नामक गुट ने क्यों इस्राईल का ही रास्ता चुना और क्यों जार्डन में रहना पसंद किया? यह ध्यान योग्य बिन्दु है।

सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि इस तथाकथित जनसेवी गुट के ज़ायोनी शासन के साथ निकट संबंध हैं और इसे सीरिया की सरकार से संघर्ष करने के लिए इस्राईल और पश्चिम की ओर से प्राचारिक और वित्तीय समर्थन प्राप्त हो रहे हैं। वर्ष 2013 में सीरिया में इस गुट के गठन और उसकी उपस्थिति और सीरिया की सरकार द्वारा इस गुट की उपस्थिति को हमेशा संदिग्ध क़रार दिया गया और कहा कि यह गुट देश के विरुद्ध और इस्राईल, पश्चिम और सीरिया के दुश्मनों के हित में काम कर रखा है।

वाइट हेलमेट्स नामक गुट अपनी दुखावटी मानवीय सहायताओं की आड़ में, सरकार के मुक़ाबले में स्वयं सको जनता का रक्षक दिखाने की चेष्टा करता है और रोचक बात यह है कि वाइट हेलमेट्स नामक गुट के बारे में जो प्रमाण मौजूद हैं उनसे यह सिद्ध होता है कि अन्य आतंकवादी गुटों के साथ मिलकर सीरिया की सरकार के विरुद्ध प्रोपेगैंडे करना और नर्म युद्ध जारी रखना इस गुट की ज़िम्मेदारी है और हालिया वर्षों के दौरान उसने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अंतर्गत आतंकवादियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों से सूचनाएं हासिल करने और सरकार के विरुद्ध डाक्युमेंट्री बनाने की ज़िम्मेदारी निभाई है।

वाइट हेलमेट्स नामक गुट की ओर से अधिकतर वीडियो में दिखाया जाता है कि वह किस प्रकार तथकथित सरकारी विमानों की बमबारी में मारे गये लोगों, बच्चों और महिलाओं को बचा रहा है, मलबे के नीचे दबे लोगों को निकाल रहा है, घायलों का उपचार कर रहा है, यह ऐसे दृश्य होते हैं जिनको देखकर हर व्यक्ति की आंखें भर जाती और वह सीरिया सरकार को ही दोषी मानता है, इसी गुट ने सीरिया सरकार पर प्रतिबंधित हथियारों के प्रयोग का आरोप लगाया और उसके बाद सीरिया सरकार के विरोधियों ने इसका अनुसरण करते हुए दमिश्क़ सरकार का जीना दूभर कर दिया।

सीरिया में रासायनिक हमलों की तथाकथित घटना भी इसी गुट की देन है किन्तु हालिया दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली कुछ वीडियो क्लिप से वाइट हेलमेट्स नामक गुट की करतूतों से पर्दा हटा और दुनिया को पता चला कि रासायनिक हमलों और आम नागरिकों पर होने वाले हमलों की सच्चाई क्या है?

दूसरा महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि इस गुट ने इस्राईल के रास्ते जार्डन की ओर फ़रार किया है और इससे पता चलता है कि इस गुट और ज़ायोनी शासन के संयुक्त लक्ष्य हैं। यहां पर इस बात का महत्व भी पता चलता है कि इस्राईल को सीरिया सरकार के साथ सैन्य मोर्चे की तुलना में अपने आतंकवादी समकक्षों के साथ नर्म युद्ध के मोर्चे की अधिक आवश्यकता है और यही कारण है कि उन्हें सरकारी बलों के हत्थे चढ़ने से पहले ही फ़रार करा दिया गया है।

तीसरा महत्वपूर्ण बिन्दु यह है कि इस गुट को सीरिया से लगी जार्डन की सीमा पर तीन महीने रुकने का अवसर दिया गया है और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस्राईल और पश्चिमी देशों को अब भी सीरिया में अपनी सफलता की आशा है और यह अवसर देकर वह यह सोच रहे हैं कि हो सकता है कि सीरिया के हालात आतंकवादियों के हित में मुड़ जाएं और सीरिया में इस गुट की वापसी का मार्ग प्रशस्त हो जाए। सीरिया में वाइट हेलमेट्स नामक गुट के तीन हज़ार सदस्य हैं जिनमें से केवल 800 लोगों को ही मुक्ति दिलाई गयी है। बहरहाल सीरिया की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह बात स्पष्ट है कि इस्राईल और पश्चिम के षड्यंत्र विफल हो गये हैं और अब वह अपने पिटे हुए मोहरों को ठिकाने लगाने के प्रयास में हैं। (AK)